गोविंद पटेल, कुशीनगर. एक तरफ जिले में मूसलाधार बारिश-आंधी और खराब मौसम से जनजीवन प्रभावित रहा तो दूसरी तरफ खड्डा विकासखंड की ग्राम पंचायत धरनी पट्टी में जी राम जी योजना के तहत चकरोड पर मिट्टी भराई के कार्य में लगातार मजदूरों की हाजिरी दर्ज किए जाने का मामला सवालों के घेरे में है. सरकारी अभिलेखों में दर्ज हाजिरी ने योजना के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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बता दें कि उपलब्ध अभिलेख के अनुसार वर्क कोड 3172002/RC/VB/YD/958486255824282538 और एमएसआर संख्या 1535 के तहत “जीपी धरनी पट्टी में शिव्बन के क्रशर से बैरागी पट्टी दिवाकर के खेत तक चकमार्ग पर मिट्टी भराई” कार्य दर्ज है. रिकॉर्ड में 25 सितंबर को 54, 26 सितंबर को 69 और 27 सितंबर को 85 मजदूरों की हाजिरी दर्ज दिखाई जा रही है. अब सवाल यह है कि जब इन दिनों क्षेत्र में लगातार तेज बारिश और खराब मौसम रहा, तब चकरोड पर मिट्टी भराई का कार्य किस तरह और किन परिस्थितियों में कराया गया? क्या वास्तव में इतनी संख्या में मजदूर मौके पर पहुंचकर काम कर रहे थे या फिर सरकारी रिकॉर्ड में ही मजदूरों की संख्या बढ़ती चली गई.

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मामले में जी राम जी योजना की निगरानी से जुड़े खंड विकास स्तर के एपीओ से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन मोबाइल फोन रिसीव नहीं हुआ. ऐसे में कार्यस्थल का स्थलीय सत्यापन, मस्टर रोल और वास्तविक मजदूरों की उपस्थिति की जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है. ग्रामीण रोजगार और गांव के विकास के लिए संचालित योजना में यदि खराब मौसम के दौरान भी रिकॉर्ड के अनुसार लगातार मजदूरों की हाजिरी लग रही है, तो यह महज संयोग है या अभिलेख और जमीनी हकीकत में अंतर इसकी जांच से ही तस्वीर साफ होगी. अब निगाहें उच्चाधिकारियों पर हैं कि वे रिकॉर्ड के आधार पर नहीं, बल्कि मौके पर स्थलीय सत्यापन कराकर सच्चाई सामने लाते हैं या नहीं.