लखनऊ. चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया पर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं. जिसे लेकर विपक्ष भाजपा पर हमलावर है. ऐसे में विपक्ष पर पलटवार करते हुए केशव मौर्य का बड़ा बयान सामने आय़ा है. उन्होंने कहा कि सपा बहादुर अखिलेश यादव, 2012 में बहन मायावती जी की सरकार के दौरान हुए विधानसभा चुनाव में सपा 224 सीटें जीतकर सत्ता में आई. फिर आपकी अपनी सरकार के रहते 2014 के लोकसभा चुनाव में सपा को उत्तर प्रदेश में मात्र 5 सीटें मिलीं और 2017 के विधानसभा चुनाव में वह 47 सीटों पर सिमट गई.
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आगे केशव मौर्य़ ने कहा कि 2012 की जीत हो या 2014 और 2017 की हार, चुनाव आयोग और EVM के लिए निष्पक्षता की कसौटी अलग-अलग नहीं हो सकती. चुनावी प्रक्रिया पर उठने वाले सवालों का आधार ठोस तथ्य और प्रमाण होने चाहिए, न कि ‘मनमाफिक’ चुनावी नतीजे. लोकतंत्र में जनादेश का सम्मान और चुनावी संस्थाओं के प्रति जवाबदेही, दोनों आवश्यक हैं.
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केशव मौर्य़ ने ये भी कहा कि चुनावी निष्पक्षता की परिभाषा ‘राजनीतिक सुविधा’ के अनुसार नहीं बदल सकती. 2027 का फैसला भी उत्तर प्रदेश की जनता ही करेगी. प्रदेश की जनता इस ‘अवसरवादिता’ को भली-भांति देख रही है और आगामी चुनावों में वह अपने वोट की ताकत से तीसरी बार भाजपा सरकार बनाकर आपकी इस भ्रम की राजनीति का निर्णायक अंत करेगी.


