लखनऊ. हाथरस की घटना को लेकर नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण का बयान सामने आय़ा है. उन्होंने कहा कि 6 साल पहले आज ही की सुबह जब देश-दुनिया सोकर उठ रही थी, तब हाथरस से आई उस खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया था. रात के अंधेरे में 2:45 बजे हाथरस की बेटी बहिन मनीषा वाल्मीकि के शव का भारी पुलिस बल द्वारा परिवार की इच्छा के विरुद्ध अमानवीय ढंग से जबरन अंतिम संस्कार करा दिया गया. जिस परिवार को अपनी बेटी को अंतिम विदाई देने का अधिकार था, उसे ही उससे वंचित कर दिया गया. यह उनके सम्मान और मौलिक अधिकारों का गंभीर उल्लंघन था.

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आगे नगीना सांसद ने कहा कि छह साल बाद भी मनीषा का परिवार न्याय, सुरक्षित आवास और रोजगार के लिए संघर्ष कर रहा है. 2022 के आदेश के बावजूद कार्रवाई न होने पर अगस्त 2026 में हाईकोर्ट को फिर हस्तक्षेप करते हुए सरकार को तीन महीने के भीतर परिवार को गाजियाबाद या नोएडा में पुनर्वासित करने और एक सदस्य को रोजगार देने का निर्देश देना पड़ा.

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चंद्रशेखर आजाद रावण ने ये भी कहा कि छह साल पहले मनीषा को न्याय नहीं मिला और माननीय उच्च न्यायालय के बार-बार आदेश के बावजूद छह साल बाद भी उनका परिवार अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है. जिस परिवार ने अपनी बेटी खोई, उसे न्याय और सम्मान के लिए भी वर्षों तक संघर्ष करना पड़े, इससे बड़ा सवाल सरकार की जवाबदेही पर और क्या हो सकता है? बहिन मनीषा, तुम्हारे साथ हुआ अन्याय कभी नहीं भूलेंगे.