मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को लखनऊ में 87 इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और 26 पुलिसकर्मियों को वीरता पदक से सम्मानित किया. कार्यक्रम में पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन भी हुआ.

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को लखनऊ में 87 इंटरसेप्टर वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इसी कार्यक्रम में अदम्य साहस, शौर्य और कर्तव्यनिष्ठा के लिए 26 पुलिसकर्मियों को वीरता पदक से सम्मानित किया गया. पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह की पुस्तक ‘संघर्ष’ का विमोचन भी किया गया.

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश पुलिस की पहचान, कानून-व्यवस्था और पुलिस सुधारों से जुड़े मुद्दों पर बात की. उन्होंने कहा कि आज यूपी पुलिस को अपनी पहचान छिपाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता.

कानून व्यवस्था पर बात

योगी आदित्यनाथ ने 2017 से पहले की कानून-व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय प्रदेश में माफिया का प्रभाव था और पुलिस के सामने भी कई चुनौतियां थीं. उन्होंने राजनीतिक नेतृत्व में निर्णय लेने की क्षमता को कानून-व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बताया.

मुख्यमंत्री ने कहा कि निर्णय लेने की क्षमता का असर बाद में दिखाई देता है. उन्होंने यूपी पुलिस के थीम ‘आपकी सुरक्षा, हमारा संकल्प’ का भी उल्लेख किया.

प्रकाश सिंह की पुस्तक

मुख्यमंत्री ने पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह के पुलिस सेवा से जुड़े अनुभवों का उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि प्रकाश सिंह ने उत्तर प्रदेश के अलावा असम, नागालैंड, पंजाब और जम्मू-कश्मीर समेत पांच राज्यों में पुलिस सेवा की और इन अनुभवों को पुस्तक ‘संघर्ष’ में शामिल किया गया है.

योगी आदित्यनाथ ने अपने कॉलेज के दिनों के दौरान उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र में रहे आतंकवाद के दौर को भी याद किया. उन्होंने कहा कि उस समय भय और दहशत का माहौल था तथा सूर्यास्त के बाद आवागमन तक बंद हो जाता था. इसी दौर में प्रकाश सिंह को पुलिस महानिदेशक की जिम्मेदारी मिली थी.

पुलिस ट्रेनिंग का जिक्र

मुख्यमंत्री ने पुलिस प्रशिक्षण की पुरानी स्थिति का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि एक समय सालाना करीब छह हजार पुलिसकर्मियों की ही ट्रेनिंग हो पाती थी.

उन्होंने PAC की वाहिनियों का जिक्र करते हुए प्रदेश में पहले लंबे समय तक चले कर्फ्यू और दंगों की स्थिति का भी उल्लेख किया. उन्होंने कोसीकलां से लेकर मेरठ और मुजफ्फरनगर तक हुई हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौर में छह महीने तक दंगे चले और प्रदेश का कोई ऐसा जिला नहीं था, जहां दंगे न हुए हों.

शहीद निरीक्षक की पत्नी सम्मानित

कार्यक्रम में एसटीएफ के शहीद निरीक्षक सुनील कुमार की पत्नी मुनेश देवी को मुख्यमंत्री ने नगद धनराशि और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया. मुख्यमंत्री ने पुलिस सेवा में निरीक्षक सुनील कुमार के सर्वोच्च बलिदान को नमन किया.

उपलब्ध सामग्री के अनुसार, निरीक्षक सुनील कुमार ने 20 जनवरी 2025 को शामली के झिंझाना क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में चार अपराधियों को मार गिराने में साहस का परिचय दिया था और कर्तव्य पालन के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए थे. स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर उन्हें मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई थी.

26 पुलिसकर्मी सम्मानित

गणतंत्र दिवस 2025 के अवसर पर घोषित राष्ट्रपति वीरता पदक से 16 पुलिसकर्मियों और गणतंत्र दिवस 2026 के अवसर पर घोषित मुख्यमंत्री वीरता पदक से 10 पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया गया. इस तरह कार्यक्रम में कुल 26 पुलिसकर्मियों को वीरता पदक से अलंकृत किया गया.इसके साथ ही 87 इंटरसेप्टर वाहनों को भी हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया.