लखनऊ. उत्तर प्रदेश में मानसून सीजन खत्म हो गया है और शनिवार सुबह ज्यादातर जिलों में धूप निकली है. मौसम विभाग ने आज किसी भी जिले में बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया है. हालांकि बारिश थमने के बाद भी नदियों का जलस्तर बढ़ा हुआ है. गंगा, शारदा समेत करीब 15 नदियां खतरे के निशान के करीब बह रही हैं. कई जिलों में बाढ़ और कटान से जनजीवन प्रभावित है.
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उन्नाव में सई का पानी गांवों में घुसा
उन्नाव में सई नदी का जलस्तर बढ़ने से 12 से ज्यादा गांव प्रभावित हैं. हजारों बीघे धान की फसल पानी में डूब गई है. सड़कें जलमग्न हैं और घरों-दुकानों में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है. उन्नाव में गंगा का जलस्तर भी खतरे के निशान से महज 9 सेंटीमीटर नीचे है. तटीय इलाकों में पानी घरों तक पहुंच गया है.
गोंडा में घाघरा खतरे के निशान से ऊपर
गोंडा में घाघरा नदी खतरे के निशान से 26 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है. करीब 30 गांव टापू में तब्दील हो गए हैं और 25 हजार से ज्यादा आबादी बाढ़ में फंसी है. कई इलाकों में गलियों में नाव चल रही हैं. गुरुवार को टेढ़ी नदी में नहाने गए तीन बच्चे डूब गए. इनमें दो की मौत हो गई, जबकि एक को बचा लिया गया.
कुशीनगर में गंडक का तेज कटान
कुशीनगर में गंडक नदी के जलस्तर बढ़ने के साथ कटान भी तेज हो गया है. पिछले 48 घंटे में छह रिहायशी झोपड़ियां और दो पक्के मकान नदी में समा चुके हैं. निचले इलाकों में पानी पहुंचने से लोगों की परेशानी बढ़ी है.
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लखनऊ-बाराबंकी में भी बाढ़ का असर
लखनऊ में सई और गोमती का जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में पांच फीट तक पानी भर गया है. बाराबंकी में सरयू उफान पर है और हेतमापुर में कटान तेज है. करीब 1100 साल पुराने बाबा नारायण दास मंदिर का एक हिस्सा नदी के किनारे लटका हुआ है. मौसम विभाग के मुताबिक, 1 जून से 30 सितंबर तक यूपी में 802.9 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य से 8% अधिक है.

