अजय सैनी, भिवानी। स्वतंत्रता सेनानी एवं पूर्व विधायक स्व. चौ. चंद्रभान के पौत्र अधिवक्ता राकेश ओबरा ने डिजिटल भुगतान और यूपीआई से जुड़े नियमों को लेकर केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि डिजिटल इंडिया और यूपीआई भुगतान व्यवस्था के नाम पर आम जनता और छोटे व्यापारियों पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। ओबरा ने कहा कि यूपीआई से जुड़े शुल्क और नियमों को लेकर सरकार को पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए।

छोटे दुकानदारों और आम उपभोक्ताओं का मुद्दा उठाया

राकेश ओबरा ने कहा कि आज आम नागरिक से लेकर छोटा दुकानदार तक डिजिटल भुगतान पर निर्भर है। ऐसे में डिजिटल लेन-देन को सुविधाजनक बनाने के बजाय किसी भी तरह का अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि छोटे दुकानदार, रेहड़ी-पटरी वाले, किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग बड़ी संख्या में कैशलेस भुगतान व्यवस्था अपना रहे हैं। ऐसे में इन वर्गों के हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

UPI शुल्क और नियमों पर स्पष्टता की मांग

ओबरा ने यूपीआई से जुड़े शुल्क और नियमों पर सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। उनका कहना है कि नियमों को लेकर स्पष्टता नहीं होने से छोटे व्यापारियों और आम उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति बन रही है। उन्होंने कहा कि डिजिटल लेन-देन पर किसी भी तरह का अप्रत्यक्ष शुल्क, नियम या अतिरिक्त आर्थिक भार जनता की कमाई पर असर डाल सकता है। इसलिए यूपीआई और अन्य डिजिटल माध्यमों से जुड़े प्रावधानों को स्पष्ट किया जाना चाहिए।

सरकार से पारदर्शिता की मांग

अधिवक्ता राकेश ओबरा ने कहा कि यूपीआई भुगतान व्यवस्था का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में इससे जुड़े शुल्क और नियमों की जानकारी आम लोगों और व्यापारियों के सामने स्पष्ट रूप से रखी जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि यूपीआई और अन्य डिजिटल माध्यमों से होने वाले लेन-देन से जुड़े नियमों तथा शुल्कों पर स्थिति तुरंत साफ की जाए। किसी भी प्रकार का छिपा हुआ शुल्क या अतिरिक्त भार जनता पर नहीं थोपा जाना चाहिए।

आर्थिक नीतियों पर भी सवाल उठाए

ओबरा ने सरकार से छोटे दुकानदारों, किसानों, मजदूरों और आम उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की। उन्होंने कहा कि छोटे कारोबारी और आम लोग डिजिटल भुगतान व्यवस्था का हिस्सा बन रहे हैं, इसलिए उन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।

विरोध की चेतावनी

अधिवक्ता ओबरा ने कहा कि यदि सरकार ने जनविरोधी आर्थिक नीतियां वापस नहीं लीं और डिजिटल लेन-देन के नाम पर आम जनता का शोषण बंद नहीं किया, तो इसके खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराया जाएगा।

UPI को लेकर आधिकारिक व्यवस्था क्या कहती है?

NPCI के अनुसार UPI तत्काल बैंक-टू-बैंक भुगतान की व्यवस्था है। NPCI के मौजूदा नियमों में अलग-अलग प्रकार के लेन-देन और व्यापारी श्रेणियों के लिए शुल्क संबंधी प्रावधान अलग हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, RuPay क्रेडिट कार्ड से जुड़े UPI लेन-देन के लिए छोटे ऑफलाइन व्यापारियों की निर्धारित श्रेणी में 2,000 रुपये तक के लेन-देन पर Nil MDR का प्रावधान दिया गया है।

ओबरा का बयान इसी व्यापक मुद्दे पर सरकार से शुल्क और नियमों को लेकर स्पष्टता तथा पारदर्शिता की मांग के तौर पर सामने आया है।

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