हेमंत शर्मा, इंदौर। नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर इंदौर नगर निगम में सियासी संग्राम उस वक्त और दिलचस्प हो गया, जब पूरे विवाद के बीच सभापति ही निंदा प्रस्ताव पास करना भूल गए। बीजेपी के विरोध प्रदर्शन और कांग्रेस के पलटवार के बीच सम्मेलन में ऐसा घटनाक्रम हुआ जिसने पूरे सदन को हैरान कर दिया।
अधिनियम के समर्थन में विशेष सम्मेलन
शनिवार को इंदौर नगर निगम में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में विशेष सम्मेलन बुलाया गया था, लेकिन संसद में बिल खारिज होने के बाद इसे निंदा प्रस्ताव में बदल दिया गया। बीजेपी की महिला पार्षद काले कपड़ों में पहुंचीं, महापौर पुष्यमित्र भार्गव काली शर्ट में नजर आए और पुरुष पार्षदों ने बाजू पर काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। सदन में बीजेपी ने विपक्ष को महिला विरोधी बताते हुए तीखा हमला बोला, वहीं कांग्रेस ने भी जवाब देते हुए बीजेपी की मंशा पर सवाल उठाए। माहौल पूरी तरह आरोप-प्रत्यारोप में बदल गया।
परिसीमन के साथ इसे लागू करने पर आपत्ति
लेकिन सबसे बड़ा ट्विस्ट तब आया, जब पूरे हंगामे और बहस के बाद सभापति निंदा प्रस्ताव को औपचारिक रूप से पास कराना ही भूल गए। उन्होंने सिर्फ सदन में मौजूद पार्षदों से सहमति पूछी और बिना विधिवत घोषणा के सीधे राष्ट्रगान शुरू करा दिया। कांग्रेस ने इस पर भी तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी सिर्फ दिखावे की राजनीति कर रही है। नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने दोहराया कि कांग्रेस महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है, लेकिन परिसीमन के साथ इसे लागू करने पर आपत्ति है।
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