Punjab Desk, चंडीगढ़. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने नई दिल्ली स्थित गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब में दिल्ली पुलिसकर्मियों के कथित रूप से प्रवेश करने का विरोध किया है. इस विषय को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह बेहद शर्मनाक है. उन्होंने पुलिस पर “तालिबानी रवैया” अपनाने एवं धार्मिक स्थल की पवित्रता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया. इसे लेकर पोस्ट शेयर करते हुए उन्होंने इस घटना की कड़ी निंदा की है.

आपको बता दें कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए कुछ प्रदर्शनकारियों द्वारा गुरुद्वारे में शरण लेने पहुंचे थे. इसके बाद शनिवार को दिल्ली पुलिसकर्मियों के गुरुद्वारा परिसर में कथित प्रवेश को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जिसे लेकर अब पंजाब में भी इसका विरोध किया जा रहा है.

मुख्यमंत्री मान ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मैं कल दिल्ली में गुरुद्वारा श्री बंगला साहिब में भाजपा की पुलिस द्वारा जबरन घुसने की कड़े शब्दों में निंदा करता हूं… इतिहास गवाह है कि गुरुओं के घर जरूरतमंदों को शरण देने के लिए हमेशा दरवाजे खुले रहते हैं… यदि प्रदर्शन कर रहे इस देश के युवा कल वहां चले गए, तो गुरु घर का उसूल है कि सेवादारों को उन्हें शरण देनी चाहिए.’उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा की दिल्ली पुलिस ने अपने तालिबानी रवैये के साथ, बिना सिर ढके और जूते पहनकर गुरुद्वारा साहिब में प्रवेश किया और गुरु घर की पवित्रता को भंग किया… सिख समुदाय इस शर्मनाक कृत्य के लिए भाजपा को कभी माफ नहीं करेगा.’’

डीसीपी ने कहा सोशल मीडिया में फैला रहे दुर्भावना

नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) सचिन शर्मा ने इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए ‘एक्स’ पर स्पष्ट किया कि वीडियो में दिख रहे पुलिसकर्मी उस सामान्य मार्ग से गुजर रहे थे जिसका इस्तेमाल श्रद्धालु गुरुद्वारे में प्रवेश करने से पहले जूते उतारने के स्थान तक जाने के लिए करते हैं. उन्होंने कहा कि यह वीडियो एक सम्मानित धार्मिक समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने और धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने की दुर्भावनापूर्ण मंशा से जानबूझकर प्रसारित किया गया है.

वहीं इस पूरे मामले में दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के प्रमुख हरमीत सिंह कालका ने नेताओं पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने और धार्मिक संस्था को बदनाम करने का आरोप लगाया है.

कालका ने कहा कि कुछ प्रदर्शनकारी विरोध प्रदर्शन के दौरान तख्तियां लेकर और नारेबाजी करते हुए गुरुद्वारा परिसर में दाखिल हुए थे, जिन्हें कर्मचारियों ने मुख्य हॉल में जबरन घुसने से रोका था.

वहीं प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए परिसर में दाखिल हुए पुलिसकर्मियों की आलोचना पर सवाल उठाते हुए कालका ने कहा कि पुलिस ने तब हस्तक्षेप किया, जब प्रदर्शनकारी गुरुद्वारे में दाखिल हो गए थे.

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