यूपीएसएलडीसी में कार्यरत 25 प्रतिशत संविदाकर्मियों की छंटनी के प्रस्ताव को उच्च स्तर से मंजूरी मिलने की जानकारी सामने आई है. मामले के विरोध के बीच राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने संविदा कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा और नियमित भर्ती समेत कई मांगें उठाई हैं.
लखनऊ. यूपीएसएलडीसी यानी यूपी स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर में काम कर रहे संविदाकर्मियों की संख्या में कटौती का प्रस्ताव सामने आया है. प्रस्ताव के तहत करीब 25 प्रतिशत संविदाकर्मियों को हटाए जाने की बात कही गई है और इसे उच्च स्तर से मंजूरी मिलने की जानकारी है. इसके बाद ऊर्जा संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है और छंटनी रोकने की मांग उठाई है.
भर्ती का मुद्दा उठा
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने सोमवार को ऊर्जा राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने विद्युत व्यवस्था को मजबूत करने से जुड़े मुद्दों को लेकर ज्ञापन सौंपा.
ज्ञापन में बिजली निगमों में सहायक अभियंता, अवर अभियंता और तकनीशियन ग्रेड-2 समेत अन्य तकनीकी पदों पर नियमित भर्ती तत्काल शुरू करने की मांग की गई.
परिषद अध्यक्ष ने बताया कि प्रदेश में करीब 3.80 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं के मुकाबले नियमित कर्मचारियों की संख्या लगभग 26 हजार है. उनके अनुसार, पिछले पांच वर्षों से कोई बड़ी भर्ती नहीं हुई है.
मंत्री ने दिया आश्वासन
बैठक के दौरान नियमित भर्ती के मुद्दे पर ऊर्जा राज्य मंत्री ने कहा कि इस विषय को मुख्यमंत्री के सामने रखा जाएगा. साथ ही विद्युत सेवा आयोग के माध्यम से नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू कराने के लिए जरूरी कदम उठाने का आश्वासन दिया.
परिषद की ओर से बिजली निगमों में काम कर रहे संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों की स्थिति का मुद्दा भी उठाया गया. बैठक में करीब 85 हजार संविदा एवं आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा लाभ सुनिश्चित करने की मांग रखी गई.
कर्मचारियों की पुनर्बहाली की मांग
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों को आउटसोर्स सेवा निगम के माध्यम से जोड़ने का प्रस्ताव रखा. इसके साथ ही करीब 25 हजार पहले निकाले गए संविदाकर्मियों को दोबारा काम पर लेने की मांग भी की गई.
परिषद के मुताबिक, ऊर्जा राज्य मंत्री ने बैठक में उठाए गए सभी मुद्दों पर सकारात्मक विचार करने का आश्वासन दिया है. इस बीच यूपीएसएलडीसी में प्रस्तावित संविदाकर्मियों की छंटनी को लेकर ऊर्जा संगठनों का विरोध जारी है.



