अमेरिका ने भारतीय फार्मा कंपनियों को बहुत बड़ी राहत देते हुए भारत समेत 20 देशों से आयात होने वाली कुछ खास दवाओं और उनके निर्माण में इस्तेमाल होने वाले जरूरी चीजों पर कोई ‘एड वैलोरम’ टैरिफ हटा दिया है. ये कदम दुर्लभ बीमारियों, बांझपन, सेल और जीन थेरेपी, एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट्स और पशु दवाओं में इस्तेमाल होने वाले प्रोडक्ट्स पर लागू होगा. हालांकि, यह छूट भारत से अमेरिका भेजी जाने वाली सभी दवाओं पर लागू नहीं होगी.

अमेरिकी सरकार केवल उन देशों से आने वाली दवाओं पर टैरिफ शून्‍य करने का फैसला किया है जिनके साथ अमेरिका का व्यापार समझौता है या निकट भविष्य में होने की संभावना है. 

भारतीय फार्मा सेक्टर (Pharma Sector) के लिए अमेरिका से एक बड़ी राहत भरी खबर आई है. अमेरिका ने भारत समेत 20 देशों से आयात होने वाली कुछ खास दवाओं और उनके इस्तेमाल होने वाले जरूरी चीजों पर वस्तुओं की कीमत के आधार पर लगने वाला प्रतिशत शुल्क नहीं लगाने का फैसला किया है.

नोटिस के अनुसार, जीरो प्रतिशत टैरिफ की दर उन प्रोडक्ट्स पर लागू होगी, जिनका इस्तेमाल गंभीर बीमारियों के इलाज, बांझपन के इलाज, सेल थेरेपी, जीन थेरेपी, एंटीबॉडी-ड्रग कॉन्जुगेट्स और जानवरों की दवाओं में होता है. इन दवाओं को बनाने में इस्तेमाल होने वाले संबंधित कच्चे माल और अन्य जरूरी घटकों को भी इस छूट में शामिल किया गया है.

वर्ल्ड कस्टम्स ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, ‘एड वैलोरम’ टैरिफ वह टैक्स है जो सामान की कीमत के एक निश्चित प्रतिशत के रूप में लिया जाता है.

भारत के साथ-साथ जिन दूसरे देशों पर ज़ीरो टैरिफ़ रेट लागू है, उनमें अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, इक्वाडोर, अल साल्वाडोर, यूरोपीय संघ, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, मलेशिया, नॉर्थ मैसेडोनिया, दक्षिण कोरिया, स्विट्ज़रलैंड, लिकटेंस्टीन, ताइवान, थाईलैंड, ब्रिटेन और वियतनाम शामिल हैं.

PTI के अनुसार US 29 सितंबर यानी आज से कुछ पेटेंट वाली दवाओं और उनसे जुड़े उत्पादों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन कुछ विशेष श्रेणी की दवाओं को इस शुल्क से बाहर रखा गया है.

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