अमेरिका में मंगलवार को मिडटर्म चुनाव के लिए मतदान जारी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के बीच हो रहे इन चुनावों को उनकी नीतियों और सरकार के कामकाज पर जनता के फैसले के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों पर मतदान हो रहा है। इसके अलावा 36 राज्यों में गवर्नर पद के लिए भी वोट डाले जा रहे हैं।

रिपब्लिकन के सामने बहुमत बचाने की चुनौती

अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी का बहुमत है। सीनेट की 100 सीटों में से रिपब्लिकन के पास 53, जबकि डेमोक्रेट्स और उनके समर्थक निर्दलीय सांसदों के पास 47 सीटें हैं। इस बार जिन 35 सीटों पर चुनाव हो रहा है, उनमें 22 पर रिपब्लिकन का कब्जा है।

वहीं, प्रतिनिधि सभा में सभी 435 सीटों पर मतदान हो रहा है। मुकाबला बेहद करीबी माना जा रहा है। CNN के पोल ऑफ पोल्स के मुताबिक, डेमोक्रेट्स को हाउस में बहुमत हासिल करने के लिए तीन और सीनेट में चार सीटों की जरूरत है।

सर्वे में डेमोक्रेट्स आगे, ट्रंप को झटका?

चुनाव से पहले आए सर्वेक्षणों में डेमोक्रेटिक पार्टी को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। जॉन जोग्बी स्ट्रैटेजीज के सर्वे में डेमोक्रेट्स को 53% और रिपब्लिकन्स को 47% समर्थन मिला। YouGov के सर्वे में यह आंकड़ा क्रमशः 53% और 44% रहा। वहीं PolityIQ के राष्ट्रीय पोलिंग औसत में डेमोक्रेट्स 52.7% और रिपब्लिकन्स 43.2% पर हैं।

महंगाई, ईरान युद्ध और इमिग्रेशन बने बड़े मुद्दे

इस चुनाव में महंगाई, ईंधन की बढ़ती कीमतें, ईरान के साथ संघर्ष, टैरिफ और इमिग्रेशन जैसे मुद्दे हावी हैं। ईरान के साथ तनाव और होर्मुज स्ट्रेट संकट का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा है। मतदाता इन मुद्दों पर ट्रंप प्रशासन के प्रदर्शन का आकलन कर रहे हैं।

ट्रंप के बाकी दो साल तय करेंगे नतीजे

अमेरिकी इतिहास में मिडटर्म चुनाव अक्सर राष्ट्रपति की पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण रहे हैं। यदि डेमोक्रेट्स किसी एक सदन में भी बहुमत हासिल कर लेते हैं, तो ट्रंप के लिए कानून पास कराना और अपनी नीतियों को लागू करना मुश्किल हो सकता है। वहीं, रिपब्लिकन बहुमत बरकरार रहने पर ट्रंप को अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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