जोशीमठ हेलिकॉप्टर हादसे के बाद यूकाडा ने चार्टर हेलिकॉप्टर में को-पायलट की मौजूदगी अनिवार्य करने का फैसला लिया है. 2 नवंबर से हर उड़ान के बाद पायलट को यूकाडा के पास रिपोर्ट भी भेजनी होगी.

देहरादून. उत्तराखंड में चार्टर हेलिकॉप्टर के संचालन को लेकर सुरक्षा नियम सख्त किए गए हैं. 30 अक्टूबर को जोशीमठ क्षेत्र में हुए हेलिकॉप्टर हादसे के बाद उत्तराखंड नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण (UCADA) ने 31 अक्टूबर को उच्चस्तरीय बैठक की. इसमें फैसला लिया गया कि अब चार्टर हेलिकॉप्टर में पायलट के साथ को-पायलट भी अनिवार्य रूप से मौजूद रहेगा. इसके अलावा हर उड़ान पूरी होने के बाद पायलट को यूकाडा के पास रिपोर्ट भेजनी होगी. ये दोनों फैसले 2 नवंबर से लागू होंगे.

बैठक में लिए गए फैसले

बैठक में हेली सेवाओं के सुरक्षा प्रोटोकॉल, मौसम संबंधी चेतावनियों के बावजूद उड़ान की अनुमति दिए जाने, ऑपरेटरों की जवाबदेही और हादसे की जांच जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. बैठक का मुख्य उद्देश्य चारधाम हेली सेवाओं की सुरक्षा निगरानी को और प्रभावी बनाना था.

हादसे के बाद एहतियात के तौर पर यूकाडा ने ट्रांस भारत एविएशन के पूरे हेलिकॉप्टर बेड़े की उड़ानों पर रोक लगा दी है.

कैसे हुआ था हादसा

ट्रांस भारत एविएशन का हेलिकॉप्टर 30 अक्टूबर को दोपहर करीब 1:12 बजे बदरीनाथ सिविल हेलीपैड से देहरादून के सहस्त्रधारा हेलीपैड के लिए रवाना हुआ था. जोशीमठ घाटी के पास पहुंचने पर दोपहर करीब 1:14 बजे हेलिकॉप्टर का रडार ट्रांसमिशन और रेडियो संपर्क टूट गया.

इसके बाद चाई गांव के नजदीक हाथी पर्वत क्षेत्र में हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस हादसे में पायलट हिमांशु सभरवाल और कर्नाटक से आए पांच श्रद्धालुओं की मौत हो गई.

दुर्गम और जंगली इलाके में राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया. सेना, एसडीआरएफ, आईटीबीपी और स्थानीय पुलिस की टीमों ने घटनास्थल से शव बरामद किए.

हादसे की जांच जारी

हेलिकॉप्टर दुर्घटना के बाद मौसम खराब होने के बावजूद उड़ान की अनुमति दिए जाने को लेकर सवाल उठे हैं. हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है.

31 अक्टूबर को विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो और डीजीसीए की टीम दुर्घटनास्थल पर पहुंची. टीम ने मौके से जरूरी जानकारियां जुटाईं और ब्लैक बॉक्स की तलाश भी की.

जांच पूरी नहीं होने के कारण टीम फिलहाल चमोली में ही रुकी हुई है. जांच दल के लौटने और पड़ताल पूरी करने के बाद डीजीसीए को रिपोर्ट सौंपी जाएगी. इसके बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा.