उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. पूर्व विधायक मनोज रावत ने राज्य में बड़े पैमाने पर वोट कटौती का आरोप लगाते हुए इस मामले में अदालत का दरवाजा खटखटाने की बात कही है.

देहरादून. सोमवार (5 अक्टूबर) को आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेता और केदारनाथ के पूर्व विधायक मनोज रावत ने राज्य की मतदाता सूची पर गंभीर आरोप लगाए. 3 अक्टूबर को निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अंतिम मतदाता सूची के बाद कांग्रेस ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की पूरी प्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है. पार्टी का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में प्रदेश के करीब 13.85 लाख वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं.

फॉर्म 7 का ऑटो-जनरेट होना

कांग्रेस नेता मनोज रावत ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान ऑटो-जनरेटेड फॉर्म 7 का उपयोग किया गया, जो निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है. उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा लगभग 97 हजार फॉर्म 7 का दुरुपयोग किया गया था. हालांकि, बूथ लेवल एजेंटों (BLO) की सतर्कता और कांग्रेस की सक्रियता के कारण इनमें से केवल सात मतदाताओं के नाम ही कट सके, जिससे गलत तरीके से नाम हटाने की कोशिश उजागर हुई.

10 सालों के आंकड़ों पर सवाल

मनोज रावत ने बताया कि उनकी पार्टी के 11,600 बीएलए-2 और 70 बीएलए-1 कार्यकर्ताओं ने जमीनी स्तर पर विधिक और तकनीकी पहलुओं का अध्ययन किया है. इस अध्ययन से यह निष्कर्ष सामने आया है कि वर्तमान में अंतिम सूची में दर्ज लगभग 72.50 लाख मतदाताओं की संख्या, ठीक 10 साल पहले राज्य में मौजूद मतदाताओं के स्तर पर पहुंच गई है. जनवरी 2025 के बाद राज्य में कुल 85,19,271 मतदाताओं के आंकड़े से घटकर इस स्तर पर आना कई तरह के संशय पैदा करता है.

न्यायालय जाने की तैयारी

कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि फर्जी शिकायतकर्ताओं और गलत तरीके से आवेदन करने वालों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई. पार्टी का मानना है कि लगभग 14 प्रतिशत मतदाताओं का नाम सूची से बाहर होना सीधे तौर पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है. पार्टी ने स्पष्ट किया है कि निर्वाचन आयोग और सत्ता पक्ष की कथित मिलीभगत के खिलाफ वह जल्द ही अदालत का दरवाजा खटखटाएगी.