वाराणसी के सिगरा क्षेत्र में छह अगस्त से लापता 19 वर्षीय ईशू कन्नौजिया की उसके तीन दोस्तों ने कथित तौर पर हत्या कर दी. पुलिस ने प्रदीप, उसके भाई रामकृष्ण और दोस्त रोहित को गिरफ्तार कर शव बरामद किया है.

वाराणसी. सिगरा थाना क्षेत्र के शिवपुरवा से छह अगस्त से लापता 19 वर्षीय ईशू कन्नौजिया की हत्या का पुलिस ने शुक्रवार रात खुलासा किया. पुलिस ने इस मामले में उसके दोस्त प्रदीप, प्रदीप के सगे भाई रामकृष्ण और उनके मित्र रोहित को गिरफ्तार किया है.

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने सात अगस्त को ईशू को शराब पिलाने के बाद उसकी हत्या की और शव के पांच टुकड़े कर प्लास्टिक के बोरे में भरकर गोबर के गड्ढे में फेंक दिया. आरोपियों की निशानदेही पर लहरतारा मार्ग स्थित खखड़िया पोखरी के पास रेलवे के खंडहरनुमा क्वार्टर के नजदीक से शव बरामद किया गया.

ऐसे रची गई साजिश

पुलिस पूछताछ में रोहित और रामकृष्ण ने बताया कि तीन अगस्त को शराब पीने के दौरान ईशू ने प्रदीप की पिटाई की थी. पुलिस के अनुसार, इसी घटना से नाराज प्रदीप ने कथित तौर पर बदला लेने के लिए हत्या की योजना बनाई.

छह अगस्त की रात ईशू को बुलाया गया. अगले दिन सात अगस्त को तीनों उसे लहरतारा-महमूरगंज पानी टंकी के पास स्थित रेलवे के खंडहरनुमा क्वार्टर ले गए. वहां उसे शराब पिलाने के बाद तीनों ने उसकी पिटाई की.

पुलिस के अनुसार, रोहित और रामकृष्ण ने ईशू के हाथ पकड़े, जबकि प्रदीप ने चापड़ से उसका गला काट दिया. इसके बाद सिर और धड़ अलग कर दिए गए और हाथ-पैर भी अलग किए जाने की बात सामने आई है. पुलिस के मुताबिक, वारदात दोपहर करीब 1:30 बजे हुई और शव को पांच टुकड़ों में काटकर प्लास्टिक के बोरे में भर दिया गया.

गोबर के गड्ढे में शव

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने शव को ऐसी जगह छिपाने की कोशिश की, जहां किसी को संदेह न हो. प्लास्टिक के बोरे में शव को गोबर से भरे गड्ढे में डाल दिया गया.

पूछताछ में प्रदीप ने पुलिस को बताया कि उसने शव छिपाने का यह तरीका यूट्यूब पर देखा था. उसका कहना था कि वह ईशू को काफी समय से जानता था और ईशू उस पर धौंस जमाता था.

शुक्रवार रात करीब 10 बजे सिगरा पुलिस ने शव बरामद किया. प्लास्टिक का बोरा खोले जाने पर गोबर की वजह से शव सड़-गल चुका था. इसके बाद शव को मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा स्थित मुर्दाघर में रखवाया गया.

ऐसे खुला हत्याकांड

ईशू छह अगस्त की शाम घर से निकला था, लेकिन रात तक वापस नहीं आया. उसके अक्सर रात में घर नहीं आने के कारण परिजनों ने तत्काल ज्यादा तलाश नहीं की. अगले दिन दोपहर तक उसके वापस नहीं आने पर परिवार ने दोस्तों और रिश्तेदारों के बीच उसकी तलाश शुरू की, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली.

करीब दस दिन बाद परिजनों ने 17 अगस्त को सिगरा थाने में गुमशुदगी की तहरीर दी. पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की.

सिगरा इंस्पेक्टर शिवाकांत मिश्रा ने ईशू के मोबाइल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड निकलवाई. जांच में उसके फोन पर आखिरी कॉल शिवपुरवा निवासी दोस्त प्रदीप की मिली. इसके बाद पुलिस ने प्रदीप को हिरासत में लेकर पूछताछ की.

पुलिस के मुताबिक, प्रदीप ने शुरुआत में जांच को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन सर्विलांस और सीसीटीवी फुटेज से मिले तथ्यों के आधार पर पूछताछ आगे बढ़ाई गई. इसके बाद उसने ईशू की हत्या की बात स्वीकार की, जिसके बाद पुलिस ने उसके भाई रामकृष्ण और दोस्त रोहित को भी गिरफ्तार कर लिया.

ईशू पर पांच मुकदमे

सिगरा इंस्पेक्टर शिवाकांत मिश्रा के अनुसार, ईशू के खिलाफ सिगरा और भेलूपुर थानों में मारपीट समेत अन्य आरोपों से जुड़े पांच मुकदमे दर्ज थे. पुलिस ने उसे मनबढ़ किस्म का बताया है.

घटना की जानकारी मिलने के बाद शिवपुरवा में ईशू के परिवार में मातम छा गया. एहतियात के तौर पर इलाके में पुलिस बल तैनात किया गया. रात में डीसीपी काशी, एडीसीपी समेत अन्य अधिकारियों ने भी घटनास्थल और मामले की जानकारी ली.

एडीसीपी काशी जोन वैभव बांगर ने बताया कि पुलिस टीम ने मामले की जांच के दौरान ईशू की गुमशुदगी, मोबाइल कॉल और अन्य साक्ष्यों को जोड़ा. पुलिस के अनुसार, प्रदीप ने ही ईशू को बुलाया था और शराब पिलाने के बाद उसकी हत्या की गई.