रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वाराणसी में मालवीय ब्रिज के समानांतर बन रहे नए रेलवे ब्रिज का नाम नमो ब्रिज रखने की घोषणा की. प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर से दिल्ली से वाराणसी तक का सफर करीब 3 घंटे 33 मिनट में पूरा होने का अनुमान बताया गया है.
वाराणसी. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वाराणसी में मालवीय ब्रिज के समानांतर तैयार किए जा रहे नए सिग्नेचर रेलवे ब्रिज का नाम नमो ब्रिज रखने की घोषणा की है. उन्होंने इसे विकास की दिशा में नया अध्याय बताया और कहा कि केंद्र सरकार इस साल उत्तर प्रदेश में रेलवे के लिए 20 हजार करोड़ रुपये दे रही है.
रेल मंत्री ने उत्तर प्रदेश को हाई स्पीड बुलेट ट्रेन नेटवर्क से जोड़ने की योजना का भी जिक्र किया. प्रस्तावित नॉर्दर्न कॉरिडोर दिल्ली से आगरा, कानपुर, लखनऊ और अयोध्या होते हुए वाराणसी तक पहुंचने की योजना में शामिल है. आगे इसे पटना और गुवाहाटी तक जोड़ने की प्लानिंग भी बताई गई है.
दिल्ली से काशी का समय
प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर शुरू होने के बाद दिल्ली से आगरा का सफर 69 मिनट में पूरा होने का अनुमान है. दिल्ली से कानपुर पहुंचने में 1 घंटा 45 मिनट और दिल्ली से लखनऊ पहुंचने में करीब 2 घंटे 12 मिनट लग सकते हैं.
काशी से लखनऊ का सफर 1 घंटा 21 मिनट और काशी से प्रयागराज की दूरी करीब 33 मिनट में तय होने का अनुमान है. दिल्ली से वाराणसी तक की यात्रा लगभग 3 घंटे 33 मिनट में पूरी हो सकती है.
परियोजना को तेज और सुविधाजनक परिवहन के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. इससे व्यापार, शिक्षा और चिकित्सा सहित विभिन्न जरूरतों के लिए एक शहर से दूसरे शहर जाने वाले लोगों को सुविधा मिलने की बात कही गई है.
रेलवे के विद्युतीकरण, आधुनिक तकनीक और स्वदेशी संसाधनों के उपयोग के जरिए ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई है.
काशी स्टेशन का विकास
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि काशी रेलवे स्टेशन को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जा रहा है. इसका उद्देश्य यात्रियों के साथ-साथ वाराणसी आने वाले श्रद्धालुओं के सफर को भी सुविधाजनक बनाना है.
स्टेशन को इस तरह विकसित करने की योजना है कि यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को काशी विश्वनाथ धाम और गंगा घाटों तक बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके. स्टेशन पर यात्रियों की आवाजाही और आधुनिक सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
चार जोड़ी मेमू ट्रेनें
रेल मंत्री ने काशी स्टेशन पहुंचकर पुनर्विकास कार्यों का निरीक्षण किया और अधिकारियों से परियोजना की जानकारी ली. उन्होंने कहा कि दिल्ली के लिए स्लीपर वंदे भारत के साथ स्थानीय यात्रियों के लिए भी नई रेल सुविधाएं शुरू की जा रही हैं.
वाराणसी सिटी और राजातालाब के बीच चार जोड़ी मेमू ट्रेनें चलाई जाएंगी. इससे वाराणसी जंक्शन, बनारस, भुलनपुर और हरदत्तपुर के यात्रियों को सीधा लाभ मिलने की बात कही गई है.
बनारस से प्रयागराज रामबाग के बीच भी नई मेमू ट्रेन चलाने की योजना है. यह सुबह 7 बजे बनारस से रवाना होकर 9 बजकर 50 मिनट पर प्रयागराज पहुंचेगी और शाम 6 बजे प्रयागराज से वापसी करेगी.
इसके अलावा बनारस-प्रयागराज मेमू सेवा को औड़िहार तक विस्तारित करने की योजना भी बताई गई है.
नमो ब्रिज की खासियत
गंगा नदी पर बनने वाले इस नए ब्रिज को अब नमो ब्रिज के नाम से जाना जाएगा. इसे देश का पहला और सबसे चौड़ा डबल-डेकर ब्रिज बताया गया है.
यह काशी रेलवे स्टेशन के पास 139 साल पुराने मालवीय ब्रिज के समानांतर बनाया जा रहा है. मालवीय ब्रिज, जिसे डफरिन ब्रिज भी कहा जाता है, वर्ष 1887 में बना था और नया पुल इससे करीब 50 मीटर की दूरी पर बनाया जा रहा है.
नमो ब्रिज नमो घाट को चंदौली की ओर पड़ाव से जोड़ेगा. इसकी मुख्य लंबाई 1074 मीटर यानी लगभग 1.07 किलोमीटर होगी, जबकि अप्रोच सहित इसकी कुल लंबाई करीब 2.5 किलोमीटर तक होगी.
इस परियोजना की लागत 2642 से 2657 करोड़ रुपये बताई गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 28 अप्रैल 2026 को इस परियोजना की आधारशिला रखी थी.
सड़क और रेल की सुविधा
ब्रिज पर छह लेन की सड़क और हाईवे की सुविधा होगी, जिसका उपयोग कार, बस और ट्रक कर सकेंगे. इससे जीटी रोड का ट्रैफिक शहर के भीतर प्रवेश किए बिना आगे निकल सकेगा.
ब्रिज के निचले हिस्से में चार रेलवे ट्रैक बनाए जाएंगे. इसे भारत में पहली बार एक ही डेक पर चार रेलवे ट्रैक वाला ढांचा बताया गया है.
रेलवे ने इस परियोजना को वर्ष 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है. इसके बनने से काशी, प्रयागराज, बिहार और पश्चिम बंगाल की रेल कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है.
बताया गया है कि नए कॉरिडोर के जरिए 100 से अधिक नई ट्रेनें चलाई जा सकेंगी.

