रांची। राज्य में वीबी-जी राम जी योजना (VB-G RAM G Scheme) के बेहतर क्रियान्वयन, निगरानी और शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी है। ग्रामीण विकास विभाग ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद के गठन का प्रस्ताव तैयार किया है। प्रस्ताव के अनुसार परिषद में अधिकारियों के साथ कम से कम 15 गैर सरकारी सदस्यों को भी शामिल किया जाएगा। परिषद के गठन को लेकर जल्द अधिसूचना जारी होने की संभावना है।

मुख्यमंत्री होंगे परिषद के अध्यक्ष

प्रस्तावित राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे, जबकि ग्रामीण विकास मंत्री उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालेंगे। राज्य स्तरीय सामान्य सभा में पंचायती राज, वित्त, वन एवं पर्यावरण, जल संसाधन, राजस्व एवं भूमि सुधार, भवन निर्माण, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता, कल्याण तथा श्रम एवं कौशल विकास जैसे विभागों से जुड़े मंत्री सदस्य होंगे।

परिषद में मुख्य सचिव के अलावा संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या सचिव स्तर के अधिकारी भी शामिल होंगे। योजना आयुक्त को सदस्य सचिव बनाया जाएगा। इसके साथ ही राज्य सरकार कम से कम 15 गैर सरकारी सदस्यों को नामित करेगी।

योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन करेगी परिषद

परिषद की प्रमुख जिम्मेदारी योजना के प्रभावी संचालन और उसकी निगरानी सुनिश्चित करना होगी। इसके तहत योजनाओं की प्रगति का निगरानी और मूल्यांकन किया जाएगा। परिषद राज्य सरकार को योजना से जुड़े विभिन्न मामलों में सुझाव भी देगी।

इसके अलावा परिषद वार्षिक रिपोर्ट तैयार करेगी और निगरानी व्यवस्था के साथ शिकायत निवारण प्रणाली की भी समीक्षा करेगी। जरूरत पड़ने पर व्यवस्था में सुधार के लिए सरकार को सिफारिशें दी जाएंगी।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनेगी संचालन समिति

योजना के परिचालन, मार्गदर्शन, समन्वय और निगरानी के लिए एक राज्य स्तरीय संचालन समिति गठित करने का भी प्रस्ताव है। इसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव या राज्य सरकार द्वारा नामित अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे।

संचालन समिति योजना की तकनीकी और परिचालन जरूरतों, डिजिटल प्रणालियों, निगरानी व्यवस्था और प्रक्रियाओं में सुधार को लेकर आवश्यक मार्गदर्शन देगी।

125 दिनों के रोजगार की गारंटी

दिए गए प्रस्ताव के अनुसार, वीबी-जी राम जी अधिनियम 1 जुलाई 2026 से ग्रामीण क्षेत्रों में लागू है। इसके तहत ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी देने का प्रावधान है।

राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित नई संस्थागत व्यवस्था का उद्देश्य योजना के संचालन से लेकर निगरानी, मूल्यांकन और शिकायतों के समाधान तक पूरी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाना है।