भुवनेश्वर/कटक | आजाद हिंद फौज के संस्थापक और भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती के अवसर पर आज पूरा देश ‘पराक्रम दिवस’ मना रहा है. इस ऐतिहासिक अवसर पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ओडिशा पहुंचे, जहां उन्होंने नेताजी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके साहस को नमन किया.

भुवनेश्वर में भव्य स्वागत

शुक्रवार को उपराष्ट्रपति के भुवनेश्वर पहुंचने पर हवाई अड्डे पर ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति और मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया. इसके बाद उपराष्ट्रपति सीधे कटक के लिए रवाना हुए, जहां नेताजी का जन्मस्थान संग्रहालय स्थित है.

“नेताजी के सपनों का भारत बनाना हमारा लक्ष्य”

कटक में आयोजित मुख्य समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने नेताजी को ‘भारत का महान सपूत’ बताया. उन्होंने कहा:

  • प्रेरणादायक यात्रा: “नेताजी के जन्मस्थान की यात्रा करना मेरे लिए अत्यंत प्रेरणादायक है. उन्होंने न केवल देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी, बल्कि आजाद भारत के शासन के लिए उनके पास एक स्पष्ट विजन था.”
  • विकसित भारत का संकल्प: उपराष्ट्रपति ने ‘कदम कदम बढ़ाए जा’ की धुन को याद करते हुए नागरिकों से आह्वान किया कि वे नेताजी के साहस और एकता के आदर्शों को अपनाएं और 2047 तक भारत को एक विकसित और गरीबी मुक्त राष्ट्र बनाने का संकल्प लें.

सुरक्षा के कड़े इंतजाम

उपराष्ट्रपति के दौरे को देखते हुए भुवनेश्वर और कटक (ट्विन सिटी) में सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत कड़ी रही. पुलिस प्रशासन द्वारा यातायात प्रबंधन के विशेष उपाय किए गए थे ताकि आम जनता को असुविधा न हो और वीआईपी मूवमेंट सुचारू रूप से चलता रहे.

क्या है पराक्रम दिवस का महत्व?

भारत सरकार नेताजी सुभाष चंद्र बोस की निस्वार्थ सेवा और राष्ट्रभक्ति के सम्मान में उनकी जयंती को ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाती है. उपराष्ट्रपति की इस भागीदारी ने इस राष्ट्रीय उत्सव के महत्व को और बढ़ा दिया है.

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