सुदीप उपाध्याय, बलरामपुर। जिले के महावीरगंज क्षेत्र में संचालित ग्रेफाइट केमिकल प्लांट को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए प्रशासन से तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्लांट से निकलने वाला रसायनयुक्त अपशिष्ट जल नदी में छोड़ा जा रहा है, जिसके चलते नदी का पानी प्रदूषित हो रहा है और इसका असर आसपास के खेतों, फसलों, पशुओं और ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।

ग्रामीणों के मुताबिक, प्लांट के आसपास के क्षेत्र में लंबे समय से प्रदूषण की समस्या बनी हुई है। उनका दावा है कि नदी में संदिग्ध रसायनयुक्त पानी पहुंचने के कारण नदी के पानी की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। इसी पानी का उपयोग खेती और पशुओं के लिए किए जाने से कई तरह की परेशानियां सामने आ रही हैं। ग्रामीणों ने फसलों के प्रभावित होने, पशुओं की मौत होने और कुछ लोगों में त्वचा संबंधी समस्याएं सामने आने का दावा किया है।

शिकायतों के बाद भी समाधान नहीं होने का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि प्रदूषण की समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों के समक्ष कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद प्लांट से निकलने वाले अपशिष्ट और नदी के पानी की गंभीरता से जांच नहीं कराई गई।

ग्रामीणों ने प्रशासन से केवल मौके पर निरीक्षण करने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से जांच कराने की मांग की है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके। इसके लिए नदी के पानी के नमूने, आसपास के खेतों की मिट्टी तथा प्लांट से निकलने वाले अपशिष्ट के नमूने लेकर अधिकृत प्रयोगशाला में जांच कराने की मांग की गई है।

निष्पक्ष जांच की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में प्लांट से निकलने वाले अपशिष्ट के कारण नदी और आसपास के पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की पुष्टि होती है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही प्रदूषण की समस्या को तत्काल रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने की मांग की गई है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन द्वारा मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द जांच और उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। ग्रामीणों का कहना है कि मामला केवल पर्यावरण से जुड़ा नहीं है, बल्कि खेती, पशुधन और आम लोगों के स्वास्थ्य से भी सीधे जुड़ा हुआ है।

जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन

मामले को लेकर तहसीलदार ने ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जांच कराने की बात कही है। तहसीलदार के अनुसार मामले की जांच कराई जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।

अब ग्रामीणों की शिकायत के बाद प्रशासन द्वारा जांच कब और किस स्तर पर कराई जाती है, इस पर सभी की नजर है। वैज्ञानिक जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि नदी के पानी, मिट्टी और फसलों पर कथित प्रदूषण का वास्तविक प्रभाव है या नहीं तथा इसके लिए कौन जिम्मेदार है। फिलहाल ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द जांच कराने और रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।

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