West Bengal SIR News: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद वोटर लिस्ट के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है और अब तो सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने दावा किया था कि SIR के दौरान जिन मतदाताओं के नाम हटाए गए, उनकी संख्या कई विधानसभा सीटों पर जीत के अंतर से अधिक थी। TMC ने ऐसे 31 सीटों का हवाला देते हुए चुनाव परिणामों पर सवाल उठाए हैं।
TMC का 31 सीटों को लेकर क्या दावा है?
TMC का तर्क है कि जिन सीटों पर जीत का अंतर SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं की संख्या से कम था, वहां मतदाता सूची में बदलाव का चुनाव परिणाम पर असर पड़ सकता है। सुनवाई के दौरान एक सीट का उदाहरण दिया गया, जहां जीत का अंतर 401 वोट था, जबकि हटाए गए मतदाताओं की संख्या 8,785 बताई गई।
TMC की ओर से इन आंकड़ों के आधार पर संबंधित सीटों पर दोबारा चुनाव की मांग से जुड़ी दलील रखी गई। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि क्या सभी 31 सीटों पर चुनाव याचिकाएं दाखिल की गई हैं और कितने हटाए गए मतदाताओं ने अपना नाम दोबारा जुड़वाने के लिए अपील की है।
ECI ने TMC के आंकड़ों पर जताई आपत्ति
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाब में कहा कि TMC ने अलग-अलग श्रेणियों के हटाए गए मतदाताओं को एक साथ जोड़ दिया है। आयोग के मुताबिक ASDD—Absentee, Shifted, Dead और Duplicate श्रेणी में हटाए गए नामों को न्यायिक अधिकारियों की जांच के बाद हटाए गए नामों के साथ जोड़ना उचित नहीं है। ECI ने दिनहाटा, खरग्राम (SC), बाली और हावड़ा उत्तर जैसी सीटों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन सीटों पर हार का अंतर न्यायिक जांच के बाद हटाए गए नामों से अधिक था।
जीती हुई सीटों का आंकड़ा भी पेश किया ECI ने
आयोग ने कहा कि यही तुलना TMC की जीती हुई सीटों पर करने पर तस्वीर अलग दिखती है। ECI के मुताबिक 21 ऐसी सीटें हैं, जहां TMC उम्मीदवार जीते, लेकिन न्यायिक जांच के बाद हटाए गए मतदाताओं की संख्या जीत के अंतर से अधिक थी। उदाहरण के तौर पर सिताई में जीत का अंतर 2,721 वोट था, जबकि हटाए गए नामों की संख्या 20,213 बताई गई।
SIR विवाद में आगे क्या?
ECI के 21 सितंबर के आंकड़ों के मुताबिक, ट्रिब्यूनल के सामने 38,31,429 अपीलें आई थीं। इनमें 22,21,118 हटाए गए मतदाताओं और 16,10,311 मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने को चुनौती देने वालों की अपीलें थीं। इनमें से 1,26,194 मामलों का निपटारा हुआ, जबकि 37,05,235 मामले लंबित थे। अब सुप्रीम कोर्ट SIR, लंबित अपीलों और चुनाव परिणामों के बीच संभावित संबंध की व्यापक जांच कर रहा है। चुनाव परिणामों पर इसका कोई प्रभाव पड़ा या नहीं, इस पर अंतिम फैसला अभी बाकी है।
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