Lifestyle Desk: भारतीय घरों में सुबह की शुरुआत अक्सर पूजा-पाठ से होती है। घर के मंदिर में भगवान को फूल और फूलों की माला चढ़ाना पूजा का अहम हिस्सा माना जाता है। पूजा के बाद जब फूल और माला मुरझा जाते हैं, तो कई लोग इन्हें नदी में प्रवाहित कर देते हैं या पेड़ के नीचे रख आते हैं, लेकिन ऐसा करने से पर्यावरण पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है।
नदियों में पूजा सामग्री के कारण कचरा बढ़ता है, वहीं पेड़ों के आसपास भी फूल-माला और दूसरी सामग्री जमा होने लगती है। ऐसे में पूजा के बाद बचे फूलों को कचरा समझकर फेंकने की बजाय घर में ही इनका दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
सबसे पहले अलग करें फूल और दूसरी सामग्री
पूजा के बाद फूलों को एक अलग पॉलीबैग या ढक्कन वाले डिब्बे में जमा करें। हालांकि इसमें फूल रखने से पहले प्लास्टिक की पन्नी, धागा, तार, क्लिप, मोती और दूसरी गैर-जैविक चीजें अलग कर दें। सिर्फ फूल, पत्तियां और जैविक सामग्री ही एक जगह रखें। इससे आगे इन्हें दोबारा इस्तेमाल करना आसान होगा।
फूलों से बनाएं घर की खाद
पुराने फूलों का सबसे अच्छा इस्तेमाल कंपोस्ट बनाने में किया जा सकता है। फूल और पत्तियों को छोटे टुकड़ों में काटकर सूखे पत्तों तथा अन्य जैविक कचरे के साथ कंपोस्ट में डालें। समय के साथ यह जैविक सामग्री खाद में बदल जाती है, जिसका इस्तेमाल घर के गमलों और पौधों में किया जा सकता है। इससे पूजा सामग्री का दोबारा उपयोग तो होता ही है, साथ ही घर से निकलने वाले जैविक कचरे को भी कम किया जा सकता है।
सूखे फूलों से बनाएं सजावट
गुलाब, गेंदे और चमेली जैसे फूलों को अच्छी तरह सुखाकर घर की सजावट में इस्तेमाल किया जा सकता है। सूखे फूलों को किसी कांच के जार, कटोरी या सजावटी प्लेट में रखकर घर को प्राकृतिक लुक दिया जा सकता है। इनसे छोटे-छोटे DIY प्रोजेक्ट भी बनाए जा सकते हैं। बच्चों के साथ क्राफ्ट एक्टिविटी के दौरान भी सूखे फूल उपयोगी साबित हो सकते हैं।
फूलों से बनाएं पोटपुरी
घर में खुशबू के लिए सूखे फूलों से पोटपुरी तैयार की जा सकती है। इसके लिए अच्छी तरह सूखे फूलों की पंखुड़ियों को किसी सुगंधित प्राकृतिक सामग्री के साथ मिलाकर एक सजावटी कटोरी में रखें। इसे कमरे या पूजा स्थल के आसपास रखा जा सकता है। हालांकि इस्तेमाल से पहले यह सुनिश्चित करें कि फूल साफ हों और उन पर किसी तरह के रसायन या कीटनाशक के अवशेष न हों।
प्राकृतिक रंग बनाने में करें इस्तेमाल
रंगीन फूलों से प्राकृतिक रंग तैयार करने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है। खासकर गेंदे और गुलाब की पंखुड़ियों से रंग निकाला जा सकता है। इनका इस्तेमाल कागज की सजावट, क्राफ्ट और दूसरे घरेलू रचनात्मक कामों में किया जा सकता है। इस तरह पुराने फूल बच्चों के लिए भी एक उपयोगी और मजेदार क्राफ्ट सामग्री बन सकते हैं।
नदी में प्रवाहित करने की बजाय अपनाएं ये तरीका
पूजा के फूलों को नदी, तालाब या पेड़ के आसपास छोड़ने की बजाय उन्हें घर में अलग जमा करना बेहतर है। फूल-पत्तियों को कंपोस्ट में डालें और प्लास्टिक, धागे, तार या अन्य सामग्री को अलग करके उचित तरीके से निपटाएं। छोटी-सी सावधानी से पूजा की परंपरा के साथ पर्यावरण की जिम्मेदारी भी निभाई जा सकती है। इसलिए अगली बार मंदिर से पुरानी फूल-माला निकालें तो उसे कचरा समझकर बाहर फेंकने की बजाय घर में ही उसका बेहतर इस्तेमाल करने की कोशिश करें।
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