Dharm Desk – दिवाली आते ही घरों में साफ-सफाई, सजावट और खरीदारी की तैयारियां शुरू हो जाती है । पाच दिवसीय दीपोत्सव की शुरुआत धनतेरस से होती है और इसके बाद नरक चतुर्दशी, दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे पर्व आते है। हालांकि, इस बार दीपावली से जुड़े त्योहारों की तारीखों को लेकर लोगों के बीच भ्रम भी है। ऐसे में जानिए इस बार धनतेरस से लेकर भाई दूज तक कौन-सा त्योहार किस दिन मनाया जाएगा और दिवाली पर लक्ष्मी पूजा कब होगी।

गोवत्स द्वादशी
दीपावली के प्रमुख त्योहारों से पहले 5 नवंबर, गुरुवार को गोवत्स द्वादशी मनाई जाएगी। इस दिन गोमाता और बछड़े की पूजा करने की परंपरा है। जिसे कई जगह स्थानीय परंपरा में बछड़ा बारस भी कहते हैं l कई स्थानों पर इसी दिन से दीपावली की तैयारियां और धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो जाते हैं।
धनतेर
धनतेरस का पर्व 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर को सुबह 10.30 मिनट से शुरू होकर 7 नवंबर को सुबह 10.47 मिनट तक रहेगी। धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और कुबेर की पूजा का विधान है। इस दिन सोना-चांदी, आभूषण, बर्तन, वाहन और घर-प्रॉपर्टी जैसी वस्तुओं की खरीदारी भी की जाती है।
काली चौदस
7 नवंबर, शनिवार को काली चौदस मनाई जाएगी। इसे नरक चतुर्दशी से भी जोड़ा जाता है । इस दिन हनुमान जी की पूजा और विशेष रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करने की परंपरा है। कई जगहों पर इस दिन दीपदान भी किया जाता है।
दिवाली और लक्ष्मी पूजा
इस साल दिवाली 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी, कार्तिक अमावस्या तिथि 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट से शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12.31 मिनट तक रहेगी। अमावस्या और लक्ष्मी पूजा के समय को देखते हुए 8 नवंबर को दीपावली का मुख्य पर्व रहेगा ।
दिवाली की रात घरों और प्रतिष्ठानों में माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की पूजा की जाती है। इसी दिन काली पूजा भी होगी। दीप जलाकर घर को रोशन करने और लक्ष्मी-गणेश की पूजा करने की परंपरा है।
गोवर्धन पूजा
दिवाली के दो दिन बाद 10 नवंबर, मंगलवार को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पर्व मनाय जाएगा । इस दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की कथा का स्मरण करते हुए गोवर्धन पूजा की जाती है। मंदिरों में अन्नकूट का विशेष आयोजन भी होता है।
भाई दूज
11 नवंबर, बुधवार को भाई दूज, यम द्वितीया और चित्रगुप्त पूजा होगी। इस दिन बहन भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनकी सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना करती हैं। वहीं कई कायस्थ परिवारों में चित्रगुप्त पूज का विशेष महत्व रहता है।

