Dharm Desk : हिंदू पंचांग का आठवां महीना कार्तिक मास कहलाता है। कार्तिक मास का आरंभ आश्विन पूर्णिमा के बाद 26 अक्टूबर से हो रहा है और इसका समापन कार्तिक पूर्णिमा के दिन 24 नवंबर को होगा। इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा के साथ सूर्यदेव की उपासना का भी विशेष महत्व होता है।ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मविश्वास, मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा और नेतृत्व का कारक माना गया है।कुंडली में सूर्य कमजोर होने पर व्यक्ति को नौकरी व्यापार और सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
कार्तिक माह को पूजा-पाठ स्नान और दान के लिए बेहद खास मानते है। इस महीने में रोजाना सुबह स्नान के बाद सूर्यदेव को जल अर्पित करना चाहिए। रविवार का दिन सूर्यदेव की पूजा के लिए विशेष होता है। ऐसे में कार्तिक मास के रविवार को सूर्यदेव की आराधना और व्रत करने से सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और आत्मविश्वास की कामना की जाती हैं। साथ ही कुछ विशेष उपाय करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है।

सूर्यदेव को प्रसन्न करने के उपाय
नियमित सूर्य को जल चढ़ाएं
कार्तिक मास में सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और तांबे के पात्र से सूर्यदेव को जल अर्पित करें। जल में लाल फूल और थोड़ा रोली डाल सकते हैं। इस दौरान सूर्यदेव के मंत्र ओम आदित्याय नमः का जाप करें।
रविवार को रखें व्रत
रविवार को सूर्यदेव की पूजा करें। अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत रख सकते हैं। पूजा के दौरान सूर्यदेव से अच्छे स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और जीवन में सफलता की प्रार्थना करें।
जरूरतमंदों को करें दान
सूर्य से संबंधित शुभ फल प्राप्त करने के लिए कार्तिक मास में लाल वस्त्र, गुड़, तांबा और गेहूं जैसी वस्तुओं का जरूरतमंदों को दान किया जा सकता है। दान अपनी सामर्थ्य के अनुसार करना चाहिए।
सूर्य मंत्रों का करें जाप
इस महीने में प्रतिदिन सूर्यदेव के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है।
ओम घृणि सूर्याय नमः
ओम ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
इन मंत्रों का श्रद्धा से जप करें साथ ही आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ भी किया जा सकता है।
सूर्यदेव की पूजा में रखें नियमितता
सूर्यदेव की उपासना करते समय साफ-सफाई और नियमितता का ध्यान रखें। सुबह उगते सूर्य को जल अर्पित करें और मन को शांत रखकर प्रार्थना करें। पूजा के साथ अपने दैनिक जीवन में अनुशासन और अच्छे आचरण को भी महत्व दें।
सूर्यदेव की पूजा करते समय रखें ये सावधानियां
कार्तिक मास में सुबह जल्दी उठने, स्नान करने और नियमित पूजा करने की परंपरा है। इस दौरान खानपान में संतुलन बनाए रखें और मौसम के अनुसार अपनी दिनचर्या अपनाएं। जरूरत से ज्यादा भोजन करने से बचें। किसी भी प्रकार का उपवास अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही करें। सूर्यदेव की पूजा में श्रद्धा, नियमितता और सेवा भाव को विशेष महत्व दिया जाता है।

