Dharm Desk :- करवा चौथ का व्रत गुरुवार, 29 अक्टूबर को रखा जाएगा। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि की कामना के साथ व्रत रखती हैं। करवा चौथ पर भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और चंद्र देव की पूजा की जाती है। महिलाएं दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को विधि-विधान से पूजा करती हैं और करवा चौथ की कथा सुनती हैं। करवा चौथ की पूजा में भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की आराधना करने की परंपरा है।
इन देवी-देवताओं की पूजा वैवाहिक जीवन में सुख, सौभाग्य और मंगलकामना से जुड़ी हुई है।
शिव और पार्वती का संबंध प्रेम, विश्वास, सर्पमण और अटूट दांपत्य का प्रतीक है। इसी कारण करवा चौथ पर महिलाएं भगवान शिव की पूजा करके अपने वैवाहिक जीवन की खुशहाली और पति की दीर्घायु की कामना करती है। शिव परिवार की आराधना को पारिवारिक सुख-शांति से भी जोड़कर देखा जाता है।
माता पार्वती को अखंड सौभाग्य और शक्ति का प्रतीक है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, माता पार्वती ने कठोर तपस्या करके भगवान शिव को अपने पति के रूप में प्राप्त किया था। उनकी कथा दृढ़ संकल्प, निष्ठा और समर्पण का संदेश देती है । करवा चौथ पर सुहागिन महिलाएं माता पार्वती से अपने सुहाग की रक्षा, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की मंगलकामना के लिए प्रार्थना करती हैं।

करवा चौथ पर गणेश जी की पूजा क्यों होती है
भगवान गणेश विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों का आरंभ करने वाले देवता है। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ धार्मिक अनुष्ठान से पहले गणेश जी की पूजा होती है। करवा चौथ की पूजा में भी उनका स्मरण करके व्रत को निर्विघ्न संपन्न करने और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। गणेश जी को बुद्धि, विवेक और मंगल के प्रतीक के रूप में भी पूजा जाता है।
करवा चौथ की पूजा में चंद्रमा का भी विशेष महत्व
करवा चौथ पर भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की आराधना के साथ चंद्र देव की पूजा भी की जाती है। परंपरा के अनुसार, महिलाएं चंद्र दर्शन करके अर्घ्य देती हैं और इसके बाद व्रत का पारण करती हैं। क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार पूजा की विधि में अंतर हो सकता है।

