Dharm Desk – आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाली पापांकुशा एकादशी भगवान विष्णु की आराधना के लिए खास है। इस दिन व्रत रखने वाले श्रद्धालु भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं। व्रत, जप और दान-पुण्य के लिए इस एकादशी का विशेष महत्व है । इस बार एकादशी तिथि 21 अक्टूबर से शुरू होकर 22 अक्टूबर तक रहेगी। ऐसे में व्रत की तारीख को लेकर लोगों के मन में सवाल है क एकादशी 21 अक्टूबर को मनाई जाएगी या 22 अक्टूबर को। पंचांग के अनुसार, इस बार एकादशी का व्रत 22 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा । इस दिन पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त भी रहेगा। आइए जानते हैं एकादशी की सही तारीख, पूजा का शुभ समय और इस व्रत से जुड़ी खास बातें।

पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि 21 अक्टूबर को दोपहर 2.11 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन 22 अक्टूबर को दोपहर 2.47 मिनट पर होगा। उदया तिथि के आधर पर एकादशी का व्रत 22 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखेंगे।

पापांकुशा एकादशी पर पूजा का शुभ मुहूर्त

22 अक्टूबर को भगवान विष्णु की पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.43 मिनट से दोपहर 12.28 मिनट तक रहेगा। इस दौरान भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जा सकती है । पूजा में पीले फूल, फल, धूप और दीप अर्पित कर भगवान का स्मरण करें। इसके अलवा विष्णु सहस्रनाम का पाठ और मंत्र जाप भी कर सकते है।

पापांकुशा एकादशी क्यों खास मानी जाती है

पापांकुशा एकादशी का संबध भगवान विष्णु की भक्ति और पुण्य प्राप्ति से है। इस दिन श्रद्धा पूर्वक व्रत रखने, भगवान विष्णु का नाम जपने और जरूरतमंदों की सहयता करने से पापों से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

एकादशी व्रत में किन बातों का ध्यान रखें

एकादशी के दिन चावल और अनाज का सेवन न करने की परंपरा है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी धार्मिक और पारिवारिक परंपरा के अनुसार फलाहार कर सकते हैं। निर्जल व्रत रखना सभी के लिए जरूरी नहीं है। अपनी सेहत और क्षमता को ध्यान में रखकर ही उपवास करें। व्रत का पारण अगले दिन द्वादशी तिथि में निर्धारित समय के अनुसार किया जाता है। इसलिए पारण का समय स्थानीय पंचांग से अवश्य देख लें। इस दिन जरूरत मंदों को भोजन या अनाज का दान करना चाहें तो अपनी सामर्थ्य के अनुसार कर सकते है।