Dharm Desk :- हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा या कोजागर पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। इस पर्व पर चंद्रदेव की पूजा, मां लक्ष्मी का आराधन और चांदनी में खीर रखने की परंपरा है। मान्यता है शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और उनकी आराधना करने वाले भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर, रविवार को मनाई जाएगी। इस अवसर पर पूजा-पाठ के साथ कुछ पारंपरिक उपाय भी किए जाते हैं, जिन्हें सुख-समृद्धि और घर में बरकत की कामना से जोड़ा जाता है।

शरद पूर्णिमा की तिथि और मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11:55 बजे शुरू होगी और 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे समाप्त होगी। चंद्रोदय शाम लगभग 5 बजे होगा। लक्ष्मी पूजा के लिए बताया गया निशीथ मुहूर्त रात 11:40 बजे से 26 अक्टूबर को रात 12:31 बजे तक है।

ये 4 उपाय शरद पूर्णिमा पर करें

1.पारंपरिक उपायों में शरद पूर्णिमा की रात पीपल के स्वच्छ पत्ते पर कुछ चावल रखने की विधि बताई जाती है। इन चावलों को हाथ में लेकर अपनी नजर उतारने के बाद घर के मुख्य द्वार के पास रखा जाता है। अगले दिन सुवह चावलों को बहते जल में प्रवाहित करने की परंपरा भी प्रचलित है, इसे कष्टों से मुक्ति की कामना से जोड़ा जाता है।

2. शरद पूर्णिमा पर गाय के दूध और चावल से खीर बनाने की परंपरा है। रात में खीर को खुले स्थान पर स्वच्छ कपड़े या जाली से ढककर रखा जाता है, ताकि चंद्रमा की रोसनी उस पर पड़े। अगले दिन भगवन को भोग लगाने के बाद इसे परिवार के सदस्यों में प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। मान्यता है कि इससे आरोग्य और सुख-शांति की कामना की जाती है।

3. इस रात मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करें। माता को खीर, मखाने और सफेद मिठाई का भोग लगाएं। लक्ष्मी मंत्रों का जाप, भजन-कीर्तन और रात्रि जागरण करने की परंपरा है । कोजागर पूर्णिमा पर रात में लक्ष्मी आराधना का विशेष महत्व माना जाता है।

    4.धन-धान्य और आर्थिक समृद्धि की कामना से मां लक्ष्मी के सामने पीली कौड़ियां रखकर पूजा करें। अगले दिन इन्हें लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख सकते है । यह उपाय पारंपरिक रूप से घर में बरकत की कामना से जुड़ा है।