राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। देश भर में जहां विजयादशमी के पावन पर्व पर रावण दहन की परंपरा है और बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाया जाता है, वहीं मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में एक ऐसा अनोखा गांव है जहां रावण को राक्षस नहीं बल्कि ‘ग्राम देवता’ मानकर पूजा जाता है। विदिशा जिला मुख्यालय से करीब 29 किलोमीटर दूर नटेरन तहसील में स्थित इस गांव की परंपराएं और मान्यताएं देश-दुनिया से बिल्कुल जुदा हैं।

500 साल पुरानी है रावण की लेटी हुई प्रतिमा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस अनोखे गांव में परमार काल का एक प्राचीन मंदिर स्थित है। इस मंदिर में रावण की करीब 10 फीट लंबी, लेटी हुई अवस्था में पाषाण (पत्थर) की एक विशाल प्रतिमा स्थापित है, जिसे लगभग 500 साल पुरानी माना जाता है।देश में जहां हर तरफ रावण के पुतले जलाए जाते हैं, वहीं इस गांव में रावण का पुतला दहन वर्जित है। दशहरे के दिन यहां पुतला जलाने के बजाय रावण बाबा की विशेष पूजा-अर्चना, आरती, हवन और विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है। कई ग्रामीण इस दिन शोक भी व्यक्त करते हैं।

शादी-विवाह का पहला निमंत्रण: गांव की अनूठी आस्था का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां के लोग किसी भी नए कार्य, वाहन की खरीदी या शादी-विवाह जैसे शुभ अवसरों की शुरुआत करने से पहले ‘रावण बाबा’ को ही पहला निमंत्रण (न्योता) देते हैं। पूजा की शुरुआत उनकी प्रतिमा की नाभि में तेल लगाकर की जाती है।

चंद्रहास तलवार और ‘जय लंकेश’ की मान्यता

मंदिर के पास स्थित एक तालाब के बीचों-बीच पत्थर की एक प्राचीन तलवार गड़ी हुई है, जिसे स्थानीय ग्रामीण रावण की पौराणिक ‘चंद्रहास तलवार’ मानते हैं। यहाँ के लोग रावण को दुष्ट नहीं, बल्कि विद्या, ज्ञान और वीरता का देवता मानते हैं। यही वजह है कि गाँव के लोग अपने वाहनों और दुकानों पर गर्व से “जय लंकेश” या “जय रावण बाबा” लिखवाते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे कभी भी कहीं भी रावण दहन देखने नहीं जाते, क्योंकि रावण बाबा उनके आराध्य देव हैं। इस अनूठे स्थल को पर्यटन के मानचित्र पर उभारने के लिए यहाँ ‘रावण लोक’ बनाने की मांग भी समय-समय पर उठती रही है।

रावण के आशीर्वाद से ही इस गांव में सुख-शांति

नरेश महाराज मंदिर के पुजारी ने परंपराओं के बारे में बताते हुए कहा कि यहां पीढ़ियों से रावण बाबा की पूजा देवता के रूप में की जाती रही है और गाँव वाले पूरी श्रद्धा के साथ हर अनुष्ठान संपन्न करते हैं। महेश तिवारी एवं ओम प्रकाश तिवारी स्थानीय निवासी ने बताया कि रावण बाबा के आशीर्वाद से ही इस गांव में सुख-शांति बनी हुई है, और उनके प्रतिगामी स्वरूप को यहां सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है।

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