Automobile Desk : भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में प्रीमियम हैचबैक गाड़ियों की मांग हमेशा से बनी रही है। इस सेगमेंट में मारुति सुजुकी की बलेनो और हुंडई की i20 दो ऐसी गाड़ियां हैं, जिनके बीच लगातार कड़ी टक्कर देखने को मिलती है। हाल के दिनों में फेसलिफ्ट अपडेट्स और नए फीचर्स के जुड़ने से ग्राहकों के सामने यह चुनने की चुनौती बढ़ गई है कि दोनों में से कौन सी कार ज्यादा किफायती और बेहतर है।

डिजाइन और बदलावों की बात करें तो मारुति ने बलेनो को एक नया और आकर्षक लुक दिया है। इसके फ्रंट ग्रिल, बंपर और हेडलाइट्स में नए प्रयोग किए गए हैं। इसके अलावा गाड़ी के इंटीरियर को भी नया रूप मिला है, जिसमें मॉडर्न इंफोटेनमेंट सिस्टम, बेहतर सेफ्टी पैकेज और रिफाइंड इंजन शामिल है। मारुति अपनी इस प्रीमियम कार की बिक्री अपने नेक्सा (Nexa) डीलरशिप नेटवर्क के जरिए करती है। दूसरी तरफ, हुंडई i20 अपने स्पोर्टी लुक, केबिन कम्फर्ट और आधुनिक फीचर्स की वजह से लंबे समय से युवाओं के बीच पहली पसंद बनी हुई है।
बिक्री के लिहाज से देखा जाए तो भारतीय बाजार में भले ही कॉम्पैक्ट एसयूवी गाड़ियों का चलन तेजी से बढ़ा है, लेकिन हैचबैक सेगमेंट की अपनी एक अलग जगह है। फेस्टिव सीजन के आसपास इन गाड़ियों की मांग में अक्सर उछाल देखने को मिलता है। इस सेगमेंट में टाटा अल्ट्रोज भी एक बड़ा विकल्प है, लेकिन मुख्य मुकाबला बलेनो और i20 के बीच ही देखा जाता है।
दोनों कारों के फाइनेंस और मासिक किस्त (EMI) के आंकड़े को समझने के लिए इनके शुरुआती यानी बेस वेरिएंट्स की तुलना की जा सकती है। मारुति बलेनो के ‘सिग्मा पेट्रोल एमटी’ और हुंडई i20 के ‘1.2 कापा पेट्रोल एमटी एरा’ वेरिएंट को ध्यान में रखते हुए यदि पूरी एक्स-शोरूम कीमत पर लोन लिया जाए, तो एक मोटा अनुमान सामने आता है। यदि ब्याज दर 9.5 प्रतिशत सालाना मानी जाए और लोन की अवधि 3 साल यानी 36 महीने रखी जाए, तो बलेनो के बेस वेरिएंट की हर महीने की किस्त लगभग 19,537 रुपये के आसपास आती है। वहीं इसी समान मापदंड पर हुंडई i20 के बेस मॉडल की EMI करीब 19,210 रुपये बैठती है।
मासिक किस्त के हिसाब से देखें तो i20 की EMI बलेनो के मुकाबले करीब 327 रुपये कम नजर आती है। हालांकि, यह अंतर इतना बड़ा नहीं है कि किसी एक गाड़ी के पक्ष में सीधा फैसला लिया जा सके। वास्तविक खरीदारी के दौरान EMI की यह रकम कई अन्य चीजों पर निर्भर करती है। गाड़ी लेते समय आप कितना डाउन पेमेंट जमा करते हैं, बैंक आपको किस ब्याज दर पर कर्ज दे रहा है, लोन की समयावधि कितनी है और आप किस शहर या डीलरशिप से गाड़ी खरीद रहे हैं—इन सभी कारणों से आपकी अंतिम किस्त में थोड़ा-बहुत बदलाव आ सकता है। इसके अलावा शोरूम की तरफ से मिलने वाले ऑफर्स और डिस्काउंट भी इस हिसाब-किताब को बदल सकते हैं।



