कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। मध्य प्रदेश में OBC के 27 प्रतिशत आरक्षण पर जबलपुर हाईकोर्ट ने 2019 के उस संशोधन को असंवैधानिक घोषित कर रद्द कर दिया है, जिसके जरिए OBC आरक्षण 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया गया था। कोर्ट ने कहा कि OBC वर्ग को 14 प्रतिशत आरक्षण का अधिकार है, लेकिन इसे 27 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए जरूरी असाधारण परिस्थितियां साबित नहीं हुईं। फैसले का असर सरकारी भर्तियों में अतिरिक्त 13 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर हुई नियुक्तियों पर भी पड़ेगा। हालांकि 29 सितंबर 2022 तक हुई नियुक्तियों को कोर्ट ने सुरक्षित रखा है।

हाईकोर्ट ने 14% OBC आरक्षण को ही सही माना। हाईकोर्ट के मुताबिक OBC की आबादी ज्यादा होना, अपने आप में 27% आरक्षण का आधार नहीं है।OBC वर्ग पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्व प्राप्त कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी और जयश्री पाटिल फैसलों का हवाला दिया। OBC आरक्षण बढ़ाने से पहले राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से परामर्श जरूरी माना। 

2019 के संशोधन में जल्दबाजी और ड्राफ्टिंग संबंधी कमियों पर भी टिप्पणी की गई। 29 सितंबर 2022 तक 27% आरक्षण के आधार पर हुई नियुक्तियां सुरक्षित हुई हैं। 29 सितंबर 2022 के बाद 14% से अधिक OBC कोटे पर हुई नियुक्तियों पर इस फैसले का असर पड़ेगा। कोर्ट ने अतिरिक्त 13% पद अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों से भरने का निर्देश दिया। 

भर्ती एजेंसियों को तीन महीने के भीतर नियुक्ति संबंधी कार्रवाई करने का निर्देश दिया। 27% आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाएं मंजूर कर संशोधन कानून रद्द कर दिया गया। साथ ही OBC आरक्षण बढ़ाने और EWS/क्षैतिज आरक्षण से जुड़ी शेष याचिकाएं भी आदेश के अनुसार खारिज कर दीं।

हाईकोर्ट ने 27% आरक्षण क्यों नहीं दिया? क्या बना मुख्य आधार

1- 50% आरक्षण की सीमा

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी बनाम भारत संघ और जयश्री लक्ष्मणराव पाटिल फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि सामान्य नियम के तौर पर आरक्षण 50% से अधिक नहीं होना चाहिए। असाधारण परिस्थितियों में ही इस सीमा से छूट पर विचार हो सकता है।मध्य प्रदेश के मामले में ऐसी असाधारण परिस्थितियां साबित नहीं मानी गईं।

2- 27% करने पर कुल आरक्षण 63%

फैसले में दर्ज आरक्षण के आंकड़ों के अनुसार SC के लिए 16%, ST के लिए 20% और OBC के लिए प्रस्तावित 27% जोड़ने पर कुल आरक्षण 63% होता है। हाईकोर्ट ने इसे 50% की निर्धारित सीमा के विपरीत माना।

3- OBC की आबादी और पर्याप्त प्रतिनिधित्व में अंतर

कोर्ट ने कहा कि आरक्षण का आधार केवल आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 16(4) में पर्याप्त प्रतिनिधित्व का सिद्धांत है, न कि अनिवार्य रूप से जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व।फैसले के निष्कर्ष में उपलब्ध उच्च शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े आंकड़ों के आधार पर OBC वर्ग को पर्याप्त प्रतिनिधित्व वाला माना गया।

4- राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से परामर्श नहीं

हाईकोर्ट ने कहा कि 50% सीमा से ऊपर OBC आरक्षण देने जैसे बड़े नीतिगत फैसले पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) से परामर्श किया जाना चाहिए था। आदेश में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने को भी कानून के खिलाफ संशोधन के पक्ष में एक अतिरिक्त आधार माना गया।

5- संशोधन में जल्दबाजी और ड्राफ्टिंग की कमियां

हाईकोर्ट ने 2019 के अध्यादेश और संशोधन कानून में तैयारी की कमी तथा कुछ ड्राफ्टिंग संबंधी त्रुटियों का भी जिक्र किया।

नियुक्तियों पर फैसले का क्या असर होगा?

29 सितंबर 2022 तक हुई नियुक्तियां 27% OBC आरक्षण के आधार पर अतिरिक्त 13% तक हुई नियुक्तियां सुरक्षित रखी जाएंगी। 29 सितंबर 2022 के बाद आदेश में 14% से अधिक OBC आरक्षण के तहत हुई नियुक्तियों के अतिरिक्त हिस्से को निरस्त करने और उसकी जगह अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियुक्ति देने की बात कही गई है। शेष 13% पद अनारक्षित वर्ग के उम्मीदवारों से भरने के लिए भर्ती एजेंसियों को तीन महीने के भीतर कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। संबंधित भर्ती एजेंसियां MPPSC, कर्मचारी चयन मंडल और अन्य संबंधित एजेंसियों को आदेश के अनुरूप कार्रवाई करनी होगी। 

जानिए क्या बोले ओबीसी महासभा संस्थापक अध्यक्ष? 

27% ओबीसी रिजर्वेशन मामले पर हाई कोर्ट के फाइनल ऑर्डर पर ओबीसी महासभा के संस्थापक अध्यक्ष विजय कुमार का बयान सामने आया है उनका कहना है कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बहुत ही दुखद निर्णय ओबीसी वर्ग के लिए दिया है, भाजपा सरकार ओबीसी वर्ग के हितेषी होने का दावा करती है लेकिन हाई कोर्ट के जरिए आदेश ओबीसी वर्ग के विपरीत आया। 

ओबीसी महासभा लंबे समय से 52% आबादी वाले वर्ग को उनका हक मिले इसकी लड़ाई लड़ रही थी, लेकिन उन्हें सिर्फ 14% रिजर्वेशन पर ही रोक दिया। ओबीसी महासभा सुप्रीम कोर्ट से लेकर सड़क तक अपने हक की लड़ाई लड़ेगी आने वाले दिनों में इसको लेकर बड़े आंदोलन की भी तैयारी अब की जाएगी। 

एक आबादी जो 10% भी है उसे 10% रिजर्वेशन के साथ अप्रत्यक्ष रूप से 13% रिजर्वेशन को मिलाकर कुल 23 प्रतिशत रिजर्वेशन का लाभ दिया जा रहा है। देश में कई राज्य ऐसे भी हैं जहां पर 50% से ज्यादा रिजर्वेशन दिया जा रहा है हम हाई कोर्ट के निर्णय का सम्मान करते हैं पर अपने हक की लड़ाई भी जरूर लड़ेंगे।

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