Dharm Desk :- दशहरे पर रावण का पुतला जलते ही जहा लोग बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव मनाते है वहीं कुछ लोग दहन समाप्त होने का इंतजार करते हैं। जैसे ही पुतला जलकर राख होता है, कई लोग उसकी बची हुई लकड़ियां और राख समेटकर घर ले जाने लगते हैं। आखिर रावण के पुतले की राख में ऐसा क्या खास है, जिसे लोग घर में रखना शुभ मानते हैं? इसके पीछे रवण के ज्ञान, उसकी समृद्धि और भगवान श्रीराम के हाथों मिली मृत्यु से जुड़ी मान्यताएं प्रचलित हैं। देश के कई स्थानों पर आज भी इस परंपरा को निभाते हैं। हालांकि, इसे किसी सर्वमान्य शास्त्रीय विधान के बजाय स्थानीय परंपरा और लोगों की आस्था से जोड़कर देखना अधिक उचित है।
रावण की राख और लकड़ियां घर क्यों लाते हैं
रावण को रामायण में प्रकांड विद्वान, शिवभक्त और लंकापति के रूप में वर्णित किया गया है। उसके पास सोने की लंका और अपार धन-संपत्ति थी। हालांकि, उसके अहं कार और माता सीता के हरण के कारण उसका अंत हुआ। इसी प्रसंग को ध्यान में रखते हुए कुछ लोग रावण के पुतले की बची हुई लकड़ियों और राख को घर लाते हैं। उनकी मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। आर्थिक परेशानियां दूर होती हैं।
कुछ परिवारों में राख को नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर से बचाव से भी जोड़कर देखा जाता है। वहीं, कुछ लोग इसे घर के किसी कोने में रखने या तिजोरी में सुरक्षित रखने की परंपरा निभाते हैं। हालांकि, इन उपायों से धन बढ़ने, वास्तु दोष दूर होने या बुरी नजर से बचाव होने का कोई प्रमाणित आधार नहीं है। ये स्थानीय मान्यताएं हैं, जिनका पालन लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार करते है।

लोग रावण की राख को लेकर क्या कहते हैं
रावण दहन के बाद जली हुई लकड़ियां इकट्ठा करने को लेकर लोगों का कहना है रावण बहुत ज्ञानी पंडित था। मान्यता है कि देवी-देवताओं और ग्रह-नक्षत्रों पर भी उसका प्रभाव था, लेकिन अहंकार के कारण उसका अंत हुआ। रावण की लकड़ियां और राख घर लाने की परंपरा सुख-संपत्ति बनाए रखने और धन की कमी दूर होने की कामना से जुड़ी है। वह यह भी मानती हैं कि भगवान श्रीराम के हाथों मृत्यु होने के कारण रावण को मोक्ष प्राप्त हुआ।
क्या शास्त्रों में भी है राख घर लाने का विधान
रावण दहन के बाद पुतले की लकड़ियां घर ले जाने की परंपरा प्रचलित है, लेकिन इसके लिए कोई विशिष्ट लिखित धार्मिक विधान ज्ञात नहीं है। उनके मुताबिक, रवण एक विद्वान था और भगवान श्रीराम के हाथों उसका अंत हुआ था। इसी वजह से कुछ लोग उसकी जली हुई लकड़ियों को प्रतीकात्मक रूप में घर ले जाते है।

