Lifestyle Desk- व्रत या फास्टिंग के दौरान खानपान में बदलाव करना आम बात है। कुछ लोग दिनभर भूखे रहते हैं, तो कुछ लोग फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें खाते हैं। हालांकि, इस दौरान कई लोगों को पेट ठीक से साफ न होने, मल त्याग में परेशानी और पेट फूलने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इसकी एक बड़ी वजह शरीर में पानी की कमी, फाइबर का कम सेवन और रोजाना की दिनचर्या में बदलाव हो सकता है। अगर आपको भी व्रत के दौरान कब्ज की समस्या हो रही है, तो कुछ आसान आदतों को अपनाकर इससे राहत पाने में मदद मिल सकती है।

फास्टिंग के दौरान क्यों होती है कब्ज की समस्या?

पानी कम पीना

व्रत के दौरान कुछ लोग पानी पीने की मात्रा कम कर देते हैं या लंबे समय तक पानी नहीं पीते। शरीर में पानी की कमी होने पर बड़ी आंत मल से अधिक पानी सोख सकती है, जिससे मल सख्त हो जाता है और उसे बाहर निकालने में परेशानी होती है।

फाइबर की कमी

रोजाना के भोजन में दाल, साबुत अनाज और सब्जियां शामिल होती हैं, लेकिन व्रत के दौरान इनकी जगह कुछ सीमित खाद्य पदार्थ ले लेते हैं। यदि भोजन में फाइबर कम हो जाए, तो मल त्याग की नियमितता प्रभावित हो सकती है।

खाने के समय में बदलाव

सामान्य दिनों में लोग तय समय पर नाश्ता, दोपहर और रात का खाना खाते हैं। फास्टिंग के दौरान भोजन का समय बदलने से भी आंतों की नियमित गतिविधि प्रभावित हो सकती है।

शारीरिक गतिविधि कम होना

व्रत में कमजोरी या थकान महसूस होने के कारण कुछ लोग शारीरिक गतिविधि कम कर देते हैं। लंबे समय तक बैठे रहने से भी कुछ लोगों में कब्ज की समस्या बढ़ सकती है।

तला-भुना और कम पौष्टिक भोजन

व्रत के नाम पर अधिक मात्रा में तली हुई साबूदाना टिक्की, चिप्स या दूसरी कैलोरी से भरपूर चीजें खाने और फल-सब्जियों को कम जगह देने से भी पाचन प्रभावित हो सकता है।

कब्ज से राहत पाने के 5 आसान घरेलू उपाय

पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं

कब्ज से बचने के लिए शरीर में पानी की कमी नहीं होने देना जरूरी है। यदि आपके व्रत में पानी पीने की अनुमति है, तो दिनभर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीते रहें। व्रत खोलने के बाद भी पानी पीने की आदत बनाए रखें। जरूरत के अनुसार पानी की मात्रा मौसम, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य पर निर्भर करती है।यदि आप निर्जला व्रत रखते हैं, तो व्रत शुरू होने से पहले और समाप्त होने के बाद पर्याप्त पानी पिएं। एक बार में बहुत ज्यादा पानी पीने के बजाय धीरे-धीरे पानी लेना बेहतर है। जिन लोगों को डॉक्टर ने तरल पदार्थ सीमित करने की सलाह दी है, उन्हें उसी के अनुसार चलना चाहिए।

फाइबर से भरपूर फल खाएं

व्रत के दौरान अपनी खानपान की परंपरा और अनुमति के अनुसार ऐसे फल चुनें जिनमें फाइबर अच्छी मात्रा में हो। अमरूद, नाशपाती, सेब और पपीता इसके अच्छे विकल्प हो सकते हैं। फाइबर मल को नरम रखने और नियमित मल त्याग में मदद करता है। फाइबर की मात्रा अचानक बहुत ज्यादा बढ़ाने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ाएं और साथ में पर्याप्त पानी भी पिएं।अगर आप फल नहीं खाते या किसी विशेष फल से परेशानी होती है, तो अपने व्रत के नियमों के अनुसार दूसरे उपयुक्त विकल्प चुन सकते हैं।

भोजन में फाइबर के दूसरे विकल्प शामिल करें

व्रत में खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों में भी कुछ ऐसे विकल्प हो सकते हैं जो फाइबर प्रदान करते हैं। उदाहरण के लिए, सीमित मात्रा में मेवे या व्रत में स्वीकार्य फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं। कुट्टू और दूसरे अनाजों से बने खाद्य पदार्थों में फाइबर की मात्रा उनकी किस्म और प्रसंस्करण के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।सिर्फ साबूदाना, आलू या तली हुई चीजों पर निर्भर रहने के बजाय भोजन में विविधता रखें। अगर आपको लंबे समय से कब्ज है, तो डाइटीशियन की मदद से अपने लिए उपयुक्त भोजन योजना तैयार कर सकते हैं।

हल्की वॉक या योग करें

अगर व्रत के दौरान आपकी तबीयत ठीक है, तो हल्की सैर करना पाचन के लिए मददगार हो सकता है। भोजन करने के बाद कुछ देर आराम से टहलें। इसके अलावा, सहजता से किए जाने वाले हल्के स्ट्रेचिंग अभ्यास भी दिनचर्या में शामिल किए जा सकते हैं।कमजोरी, चक्कर या अत्यधिक थकान महसूस होने पर व्यायाम करने से बचें। खाली पेट कठिन एक्सरसाइज करने के बजाय अपने शरीर की स्थिति के अनुसार गतिविधि चुनें।

मल त्याग की आदत नियमित रखें

व्रत के दौरान दिनचर्या बदलने के बावजूद शौच जाने की इच्छा को लंबे समय तक न रोकें। रोजाना एक सुविधाजनक समय पर शौचालय जाने की आदत बनाएं। जल्दबाजी न करें और बहुत जोर लगाने से बचें। शौचालय में पैरों के नीचे छोटा स्टूल रखने से कुछ लोगों को मल त्याग करने में आसानी हो सकती है।यदि कब्ज की समस्या बार-बार होती है, तो अपनी दिनचर्या, भोजन और पानी पीने की आदतों पर ध्यान दें। बिना डॉक्टर की सलाह के बार-बार जुलाब या घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल न करें।

क्या व्रत में दूध या दही खाने से कब्ज दूर हो सकती है?

दूध और दही कुछ लोगों के लिए व्रत के दौरान भोजन का हिस्सा होते हैं, लेकिन ये हर व्यक्ति में कब्ज दूर नहीं करते। दही में जीवित लाभकारी बैक्टीरिया हो सकते हैं, हालांकि इसका असर उत्पाद और व्यक्ति के अनुसार अलग-अलग होता है। कुछ लोगों को दूध से पेट फूलने या दूसरी पाचन संबंधी परेशानी भी हो सकती है। इसलिए केवल दूध या दही को कब्ज का इलाज न मानें। पर्याप्त पानी, फाइबर और नियमित शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देना अधिक उपयोगी है।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

कभी-कभार कब्ज होना आम है, लेकिन इसे लगातार नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि कब्ज कई दिनों तक बनी रहे, बार-बार लौट आए या घरेलू उपायों से राहत न मिले, तो डॉक्टर से सलाह लें। पेट में तेज दर्द, उल्टी, पेट का बहुत ज्यादा फूलना, मल में खून आना या गैस और मल बिल्कुल न निकलना जैसे लक्षण हों, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।

ध्यान रखें फास्टिंग के दौरान कब्ज से बचने के लिए पर्याप्त पानी, फाइबर युक्त भोजन और नियमित दिनचर्या महत्वपूर्ण हैं। व्रत के नियमों का पालन करते हुए अपनी सेहत का भी ध्यान रखें। यदि व्रत के कारण बार-बार कमजोरी, डिहाइड्रेशन या कब्ज हो रही है, तो अपने स्वास्थ्य के अनुसार उपवास की अवधि और खानपान में बदलाव करने के लिए डॉक्टर से सलाह लें।