Lifestyle Desk :-अक्टूबर और नवंबर में मौसम तेजी से बदलता है। सुबह-शाम ठंडक बढ़ने लगती है, हवा में नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इसी दौरान कई लोगों को बार-बार खांसी, गले में खराश या बलगम की परेशानी शुरू हो जाती है। कुछ लोगों में यह समस्या कुछ दिनों में ठीक हो जाती है, जबकि कुछ लोगों की खांसी लंबे समय तक बनी रहती है।ऐसे में सबसे बड़ा सवाल होता है कि खांसी आखिर शुरू क्यों हुई? क्या यह मौसम बदलने से होने वाली एलर्जी है, किसी वायरल संक्रमण का संकेत है या फिर बढ़ता वायु प्रदूषण इसकी वजह है? इन तीनों स्थितियों में लक्षण कुछ हद तक एक जैसे हो सकते हैं, इसलिए इन्हें पहचानना जरूरी है। आइए इसके बारे में जानते हैं विस्तार से।
मौसम बदलने पर एलर्जी क्यों बढ़ती है?
मौसम बदलने के दौरान हवा में धूल, मिट्टी, परागकण और दूसरे एलर्जी पैदा करने वाले कण बढ़ सकते हैं। संवेदनशील लोगों में इनके संपर्क में आने पर गले में खराश, सूखी खांसी, छींक और नाक बहने जैसी समस्या हो सकती है।एलर्जी वाली खांसी में आमतौर पर तेज बुखार नहीं होता। धूल या किसी खास जगह पर जाने के बाद खांसी बढ़ना भी एलर्जी की तरफ इशारा कर सकता है। कुछ लोगों को इसके साथ आंखों में खुजली या पानी आने की समस्या भी होती है।
वायरल संक्रमण में कैसे पहचानें?
अगर खांसी के साथ गले में दर्द, शरीर में थकान, नाक बहना, सिरदर्द या बुखार जैसे लक्षण भी हैं, तो वायरल संक्रमण की संभावना हो सकती है। वायरल संक्रमण में खांसी शुरुआत में सूखी हो सकती है और बाद में बलगम भी आ सकता है।अगर घर या आसपास किसी व्यक्ति को हाल में सर्दी-जुकाम या वायरल संक्रमण हुआ है और उसके संपर्क के बाद लक्षण शुरू हुए हैं, तो संक्रमण की संभावना को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

प्रदूषण भी हो सकता है बड़ी वजह
अक्टूबर-नवंबर के दौरान कई शहरों में हवा की गुणवत्ता खराब होने लगती है। हवा में मौजूद धूल और सूक्ष्म प्रदूषक कण सांस की नली में जलन पैदा कर सकते हैं। इससे सूखी खांसी, गले में खराश, सांस लेने में परेशानी या सीने में भारीपन महसूस हो सकता है।प्रदूषण से होने वाली खांसी अक्सर बाहर निकलने, ट्रैफिक वाली जगह पर रहने या धूल-धुएं के संपर्क में आने के बाद ज्यादा महसूस हो सकती है। जिन लोगों को पहले से सांस संबंधी परेशानी है, उनमें इसका असर ज्यादा हो सकता है।
तीनों में अंतर कैसे समझें?
अगर खांसी के साथ छींक, नाक में खुजली और आंखों से पानी आ रहा है और बुखार नहीं है, तो एलर्जी की संभावना हो सकती है।
अगर बुखार, बदन दर्द, गले में दर्द और कमजोरी के साथ खांसी है, तो वायरल संक्रमण की संभावना हो सकती है।
वहीं, अगर बाहर निकलने या धूल-धुएं के संपर्क में आने पर खांसी बढ़ती है, गले में जलन रहती है और घर के अंदर आने पर कुछ राहत मिलती है, तो प्रदूषण इसका कारण हो सकता है।
हालांकि केवल लक्षणों के आधार पर खुद से बीमारी का कारण तय करना हमेशा सही नहीं होता। कई बार एलर्जी और संक्रमण के लक्षण एक-दूसरे से मिल सकते हैं।
खांसी होने पर क्या सावधानी रखें?
1-मौसम बदलने के दौरान पर्याप्त पानी पीते रहें और धूल-धुएं से बचने की कोशिश करें। बाहर निकलते समय अच्छी गुणवत्ता वाला मास्क पहनना भी मददगार हो सकता है। घर में धूल जमा न होने दें और कमरे में पर्याप्त हवा का आवागमन रखें।
2-अगर खांसी कई दिनों तक बनी रहे, लगातार बढ़ती जाए या इसके साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, तेज बुखार, खून आना या बहुत ज्यादा कमजोरी जैसे लक्षण हों, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
इसलिए नवंबर में होने वाली हर खांसी को सिर्फ मौसम का असर मानकर नजरअंदाज न करें। खांसी के साथ आने वाले दूसरे लक्षणों और उसके ट्रिगर पर ध्यान देकर इसकी संभावित वजह को समझने में मदद मिल सकती है।

