Dharm Desk :- प्राचीन भारतीय परंपरा में पितरों यानी पूर्वजों का आशीर्वाद जीवन की उन्नति और सुख-शांति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। ऐसा कहते हैं कि यदि घर में पितृ दोष हो तो इंसान को तरक्की में बाधाएं पारिवारिक कलह, बीमारी और अकारण धन हानि जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अधिकांश लोग पितृ दोष के निवारण के लिए कई कठिन और खर्चीले अनुष्ठानों की मदद लेते है। लेकिन शास्त्रों और लोक परंपराओं में बहुत सरल और प्रभावी उपाय भी बताए गए हैं। उन्हीं में से एक विशेष उपाय है आटे से बने चौमुखी दीपक का जो पितरों की शांति और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने में अत्यंत शुभकारी माना जाता है।
इसे जलाने का सही विधान
इस उपाय को करने के लिए सबसे पहले थोड़े से गेहूं के आटे में चुटकी भर हल्दी और थोड़ी सी काले तिल मिलाकर आटा गूंथ ले।अब इसके बाद इस आटे से एक चार मुख वाला चौमुखी दीपक बनाएं और उसमें चार दिशाओं की ओर सफेद रुई की बत्तियां लगाएं। इसमें तिल का तेल या शुद्ध देसी घी डालकर दीपक को प्रज्वलित करें। दीपक जलाते समय मन ही मन अपने पितरों का ध्यान करते हुए उनसे जाने-अनजाने में हुई गलतियों की क्षमा मांगें।

मुख्य द्वार पर दीपक जलाने के लाभ
1.चौमुखी दीपक तैयार करने के बाद इसे घर के मुख्य दरवाजे के बाहर रखकर जला दें।
2.घर के दरवाजे पर दीपक जलाने से आसपास का वातावरण सकारात्मक रहता है।
3.श्राद्ध पक्ष में श्रद्धा के साथ मुख्य द्वार पर दीपक जलाना पितरों को समर्पित माना जाता है।इससे पितृ दोष से जुड़ी परेशानियों में राहत मिलती है।
4.पितरों का आर्शीवाद मिलने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और कामकाज में आ रही रुकावटें कम होती हैं।

