Lifestyle Desk – भारतीय घरों में गेहूं की रोटियां रोजाना खाने का हिस्सा होती हैं। आमतौर पर लोग गेहूं को पिसवाकर आटा तैयार करवाते हैं, लेकिन क्या आपने कभी ध्यान दिया है कि कुछ लोग गेहूं के साथ थोड़ा काला चना भी पिसवाते हैं? दरअसल, गेहूं और काले चने का मिश्रण आटे की पौष्टिकता बढ़ाने का एक पारंपरिक तरीका है। काले चने में प्रोटीन, फाइबर, आयरन और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। ऐसे में अगर आप भी रोजाना एक ही तरह की रोटियां खाकर बोर हो गए हैं, तो गेहूं के आटे में काला चना मिलाना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। आइए जानते हैं इसके फायदे और इसे इस्तेमाल करने का सही तरीका।

गेहूं के आटे में काला चना क्यों मिलाया जाता है?

गेहूं मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट और कुछ मात्रा में प्रोटीन प्रदान करता है। वहीं, काला चना प्रोटीन, फाइबर और खनिज तत्वों का अच्छा स्रोत है। जब इन दोनों को मिलाकर आटा तैयार किया जाता है, तो रोटियों में पोषक तत्वों की विविधता बढ़ जाती है।काले चने में मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर बनाए रखने और पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद करता है। यही वजह है कि कई घरों में गेहूं के साथ चना मिलाकर आटा पिसवाने की परंपरा रही है।

गेहूं और काले चने के आटे की रोटियां खाने के फायदे

लंबे समय तक पेट भरा रखे

अगर आपको खाना खाने के कुछ ही समय बाद भूख लगने लगती है, तो गेहूं और काले चने के मिश्रित आटे की रोटियां मददगार हो सकती हैं। काले चने में मौजूद फाइबर पाचन की प्रक्रिया को धीमा करता है, जिससे पेट देर तक भरा महसूस हो सकता है। इससे बार-बार कुछ खाने की इच्छा को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।

मांसपेशियों के लिए फायदेमंद

काले चने में प्लांट बेस्ड प्रोटीन पाया जाता है, जो मांसपेशियों के निर्माण और उनकी मरम्मत के लिए जरूरी है। गेहूं के साथ चना मिलाने से रोटी में प्रोटीन की मात्रा बढ़ती है। खासकर शाकाहारी लोगों के लिए यह रोजमर्रा की डाइट में प्रोटीन शामिल करने का एक आसान तरीका हो सकता है।

पाचन तंत्र को रखे दुरुस्त

काले चने में मौजूद फाइबर आंतों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। पर्याप्त फाइबर लेने से कब्ज की समस्या से बचाव में सहायता मिल सकती है। हालांकि, जिन लोगों को चना खाने से गैस या पेट फूलने की परेशानी होती है, उन्हें इसकी मात्रा कम रखनी चाहिए।

ब्लड शुगर मैनेजमेंट में मददगार

काले चने में मौजूद फाइबर और प्रोटीन भोजन के बाद ब्लड शुगर के तेजी से बढ़ने को धीमा करने में मदद कर सकते हैं। गेहूं के आटे में चना मिलाने से रोटी का पोषण संतुलन बेहतर हो सकता है। हालांकि, डायबिटीज के मरीजों को यह समझना जरूरी है कि इसमें गेहूं के कार्बोहाइड्रेट भी मौजूद रहते हैं। इसलिए केवल चना मिलाने से रोटी डायबिटीज-फ्री नहीं हो जाती।

आयरन और मिनरल्स का अच्छा स्रोत

काले चने में आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये शरीर के सामान्य कामकाज, ऊर्जा उत्पादन और मांसपेशियों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं। गेहूं के साथ काला चना मिलाकर खाने से डाइट में इन पोषक तत्वों को शामिल करने में मदद मिलती है।

गेहूं में कितना काला चना मिलाकर पिसवाएं?

अगर आप पहली बार गेहूं के साथ काला चना मिलाकर आटा तैयार करवा रहे हैं, तो शुरुआत कम मात्रा से करें। 5 किलो गेहूं में लगभग 250 से 500 ग्राम काला चना मिलाया जा सकता है।चने को साफ करके गेहूं के साथ चक्की पर पिसवाएं। शुरुआत में कम मात्रा रखें, ताकि स्वाद और पाचन के अनुसार इसे एडजस्ट किया जा सके। आटे को एयरटाइट डिब्बे में रखें और नमी से बचाएं।

किन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी?

काले चने में फाइबर अधिक होता है, इसलिए कुछ लोगों को इसे खाने से गैस, पेट फूलने या भारीपन की समस्या हो सकती है। ऐसे लोग शुरुआत में कम मात्रा में इसका सेवन करें। जिन लोगों को चने या गेहूं से एलर्जी है, उन्हें इसका सेवन नहीं करना चाहिए। वहीं, सीलिएक डिजीज या ग्लूटेन से जुड़ी समस्या वाले लोगों के लिए गेहूं का आटा उपयुक्त नहीं है।

रोज की रोटी को बनाएं थोड़ा ज्यादा पौष्टिक

गेहूं के आटे में काला चना मिलाना कोई जादुई नुस्खा नहीं, बल्कि रोजमर्रा के भोजन की पौष्टिकता बढ़ाने का एक सरल तरीका है। संतुलित मात्रा में इसका सेवन करने से प्रोटीन, फाइबर और जरूरी मिनरल्स की पूर्ति में मदद मिल सकती है। हालांकि, बेहतर सेहत के लिए रोटियों के साथ हरी सब्जियां, दाल, दही और सलाद को भी अपनी थाली में शामिल करना जरूरी है।