Dharm Desk – आज 22 अक्टूबर, गुरुवार को पापांकुशा एकादशी मनाई जा रही है। हिंदू धर्म में एकादशी तिथि भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के लिए विशेष मानी जाती है। वहीं, खाटू श्याम बाबा के भक्तों के लिए भी एकादशी का दिन खास महत्व भी रखता है। इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु निशान लेकर बाबा के दरबार में पहुंचते हैं। बाबा श्याम को भगवान श्रीकृष्ण का वरदान प्राप्त है। धार्मिक कथा के अनुसार, महाभारत युद्ध से पहले बर्बरीक ने अपना शीश दान कर दिया था। उनके इस महान त्याग से प्रसन्न होकर भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें कलियुग में श्याम नाम से पूजे जाने का वरदान दिया था। आइए जानते हैं कि बाबा श्याम के लिए एकादशी का दिन इतना खास क्यों माना जाता है।
शीश दान के बाद मिला वरदान
बर्बरीक महाभारत काल के महान योद्धा थे। वे घटोत्कच के पुत्र और भीम के पौत्र थे। महाभारत युद्ध में शामिल होने से पहले उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को अपना शीश दान कर दिया था। बर्बरीक के इस त्याग से प्रसन्न होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में वे श्याम नाम से पूजे जाएंगे और हारे हुए लोगों का सहारा बनेंगे।
इसी मान्यता के कारण बर्बरीक को खाटू श्याम बाबा के रूप में पूजा जाता है। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू श्याम मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। यहां साल भर भक्त बाबा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। एकादशी के दिन भी मंदिर में विशेष श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की जाती है।
एकादशी भगवान विष्णु की पूजा के लिए खास है
हर महीने दो एकादशी आती हैं। एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। इस तरह साल में 24 एकादशी होती है । वैष्णव परंपरा में एकादशी व्रत को विशेष महत्व दिया गया है। इस दिन भगवान विष्णु और उनके विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। खाटू श्याम बाबा को भगवान श्रीकृष्ण का स्वरूप मानकर पूजा जाता है । इसी बजह से बाबा के भक्त एकादशी को उनके दर्शन, भजन-कीर्तन और व्रत के लिए विशेष दिन मानते हैं। हालांकि, बाबा श्याम का प्रमुख वार्षिक उत्सव फाल्गुन शुक्ल एकादशी के अवसर पर मनाए जाने वाले लक्खी मेले से जुड़ा है।
पापांकुशा एकादशी का क्या है महत्व
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पापांकुशा एकादशी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा करने की परंपरा है। श्रद्धा के साथ व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को अपने पापों से मुक्ति पाने तथा जीवन में सद्कर्मों की ओर बढ़ने की प्रेरणा मिलती है।
इस दिन भक्त सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। पूजा में तुलसी दल, फल और दीपक अर्पित किए जाते हैं। कई श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार निर्जल व्रत रखते हैं, जबकि कुछ फलाहार करते हैं।
खाटू श्याम बाबा का जन्मोत्सव कब मनाया जाता है
खाटू श्याम बाबा का जन्मोत्सव कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाते है। इसे देवउठनी एकादशी भी कहा जाता है। इस अवसर पर खाटू धाम में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन करने पहुंचते हैं। वहीं, फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी पर बाबा श्याम का प्रसिद्ध लक्खी मेला आयोजित होता है।

