हेमंत शर्मा, इंदौर। जब इश्क सिर चढ़कर बोलने लगे और हवस जुनून बन जाए, तो सबसे पहले रिश्ते और इंसानियत का कत्ल होता है। इंदौर से सामने आई यह वारदात किसी बॉलीवुड क्राइम-थ्रिलर से कम नहीं है, जहां एक पत्नी ने अपने प्रेमी के संग मिलकर अपने ही पति की हत्या कर दी। लेकिन कहते हैं न कि पाप का घड़ा कितना भी बड़ा हो, एक न एक दिन फूटता जरूर है। करीब 3 साल तक चले कानूनी ड्रामे के बाद आखिरकार अदालत ने अपना फरमान सुना दिया है। तीनों गुनहगारों को अब अपनी बाकी जिंदगी जेल की सलाखों के पीछे काटनी होगी।
‘पति गायब हो गया साहब…’ थाने में रचा झूठी हमदर्दी का नाटक
कहानी शुरू होती है 22 अप्रैल 2023 से। चंदन नगर थाने में एक रोती-बिलखती औरत दाखिल होती है। रुखसाना नाम की महिला ने पुलिस के सामने ऐसी कहानी गढ़ी कि सुनने वाला भी भावुक हो जाए। उसने कहा, “पति जावेद काम की तलाश में घर से निकले थे, रात को फोन पर बोला था कि सब्जी लेकर घर आ रहा हूं… लेकिन उसके बाद से कोई अता-पता नहीं है।” पहली नजर में पुलिस को लगा कि मामला गुमशुदगी का है। लेकिन कातिल कितना भी शातिर क्यों न हो, कोई न कोई सुराग ज़रूर छोड़ जाता है।
कॉल डिटेल खंगाली तो उड़े होश: ‘पति’ नहीं, ‘प्रेमी’ था दिल के करीब!
जावेद के परिजनों को रुखसाना के चाल-चलन पर पहले से शक था। उन्होंने पुलिस के कान में सिर्फ एक नाम फुसफुसाया— सद्दाम हुसैन।बस फिर क्या था! पुलिस ने जैसे ही रुखसाना, उसके प्रेमी सद्दाम और सद्दाम के साथी शाकिर खान की कॉल डिटेल्स और लोकेशन की कुंडली खंगाली, तो पूरी ‘गुमशुदगी’ की हवा निकल गई। मोबाइल टॉवरों की लोकेशन से पता चला कि जिस वक्त जावेद गायब हुआ, उस वक्त रुखसाना का प्रेमी और उसका दोस्त आसपास ही मंडरा रहे थे।
21 अप्रैल की वो खौफनाक रात…
पुलिस की कड़क पूछताछ के आगे सद्दाम ज्यादा देर टिक नहीं पाया और टूट गया। उसने जो कबूला, उसे सुनकर पुलिस वालों के भी रोंगटे खड़े हो गए।सद्दाम और रुखसाना का अफेयर चल रहा था, और जावेद उनके इस ‘अवैध इश्क’ के रास्ते का सबसे बड़ा कांटा बन चुका था। 21 अप्रैल 2023 की खौफनाक रात को रुखसाना, सद्दाम और शाकिर ने मिलकर जावेद की जीवन-लीला समाप्त कर दी। कत्ल करने के बाद पहचान छिपाने की नीयत से लाश को ग्रीन पार्क कॉलोनी के एक सुनसान, वीरान मैदान में फेंक दिया गया।
अदालत का हंटर: तीनों को उम्रकैद, सलाखों के पीछे कटेगी जिंदगी
वैज्ञानिक साक्ष्य (Scientific Evidence) और मजबूत तकनीकी सबूतों के आगे आरोपियों की चालाकी काम न आ सकी। नवम अपर सत्र न्यायाधीश विवेक कुमार चंदेल की अदालत में विशेष लोक अभियोजक सुरेंद्र सिंह वास्केल ने ऐसी पैरवी की कि बचाव पक्ष के पास कोई जवाब नहीं बचा।अदालत ने सद्दाम हुसैन, शाकिर खान और रुखसाना, तीनों को हत्या और आपराधिक षड्यंत्र का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुना दी।
कानून का कड़ा संदेश
झूठी गुमशुदगी की मनगढ़ंत कहानी, प्यार का मुखौटा और कत्ल का षड्यंत्र… आखिरकार कानून के शिकंजे के सामने ढेर हो गया। इंदौर का यह फैसला उन तमाम अपराधियों के लिए एक सीधा सबक है कि जुर्म का रास्ता चाहे कितना भी आसान दिखे, उसका अंत सिर्फ और सिर्फ सलाखें ही होता है।
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