Dharm Desk : करवा चौथ हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष होता है। जिसका सुहागन महिला है साल भर इंतजार करती है। इस साल करवा चौथ की तारीख को लेकर कुछ लोगों के मन में असमंजस है। कोई 28 अक्टूबर को व्रत रखने की बात कर रहा है तो कोई 29 अक्टूबर को। ऐसे में व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए सही तिथि, पूजा मुहूर्त और चंद्रोदय का समय जानना जरूरी है।
करवा चौथ का व्रत क्यों रखा जाता है
करवा चौथ के दिन महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ व्रत रखती है। करवा चौथ का व्रत निर्जला रखा जाता है। इसमें महिलाएं सुबह सरगी ग्रहण करने के बाद सूर्योदय से चंद्रोदय तक अन्न और जल ग्रहण नहीं करती हैं। शाम को सोलह शृंगार करके भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की पूजा करती है। इसके बाद करवा चौथ की कथा सुनती हैं। चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति के हाथों से जल ग्रहण करके व्रत खोलती हैं।
29 अक्टूबर को रखा जाएगा करवा चौथ का व्रत
पंचांग के अनुसार, इस साल करवा चौथ का व्रत गुरुवार, 29 अक्टूबर को रखा जाएगा। कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को रात 1 बजकर 6 मिनट पर शुरू होगी और रात 10 बजकर 9 मिनट पर समाप्त होगी। चतुर्थी तिथि में सूर्योदय होने के कारण 29 अक्टूबर को ही करवा चौथ का व्रत रखा जाएगा। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं को 28 अक्टूबर के बजाय 29 अक्टूबर की तैयारी करनी चाहिए।
छत्तीसगढ़ में करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त
छत्तीसगढ़ के पंचांग के अनुसार, 29 अक्टूबर को करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 29 मिनट से 6 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इस दौरान महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की पूजा कर सकती है। इसके साथ ही करवा चौथ की कथा सुनने और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा करने का समय भी यही रहेगा।

करवा चौथ के प्रमुख समय एक नजर में
व्रत की तारीख: गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: रात 1:06 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त: रात 10:09 बजे
रायपुर में पूजा मुहूर्त: शाम 5:29 से 6:45 बजे तक
रायपुर में चंद्रोदय: रात लगभग 8:18 बजे
चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोला जाएगा
करवा चौथ में चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व है। महिलाएं दिन भर निर्जला व्रत रखने के बाद चंद्रमा निकलने का इंतजार करती हैं। चंद्र देव के दर्शन छलनी से करने, अर्घ्य देने और पति की लंबी आयु की कामना करने की जाएगी। इसके बाद पति के हाथों से जल ग्रहण करके व्रत खोला जाता है।

