Dharm Desk : करवा चौथ का पावन पर्व आज, 29 अक्टूबर गुरुवार को देशभर में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखी हैं। करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन करने और अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलने की परंपरा है। लेकिन इस बार मौसम की स्थिति व्रती महिलाओं की चिंता बढ़ा सकती है। बंगाल की खाड़ी से उठे अर्नब तूफान के असर से देश के कई हिस्सों में देखने को मिलेगा। मौसम बदलने, तेज हवाएं चलने और बारिश होने की खबरें सामने आ रही हैं। ऐसे में बादलों के कारण यदि चंद्रमा दिखाई नहीं देता है, तो महिलाओं के मन में सवाल उठ सकता है कि व्रत कैसे पूरा करें और चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि क्या होगी।
चंद्रमा दिखाई नहीं दे तो क्या करें
करवा चौथ पर चंद्र दर्शन का विशेष महत्व है। हालांकि, खराब मौसम या आसमान में घने बादल होने के कारण चंद्रमा नजर नहीं आए, तो घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसी स्थिति में कुछ परंपराओं में चंद्रमा का प्रतीक बनाकर पूजा करने का विकल्प बताया गया है। व्रती महिलाएं अपने घर पर ही विधि-विधान से पूजा कर सकती हैं। इसके लिए एक साफ थाली, सफेद चंदन, अक्षत, सफेद पुष्प और जल की व्यवस्था कर लें।
थाली में चंद्रमा का प्रतीक बनाकर पूजा करें
चंद्रमा के दर्शन नहीं होने पर एक साफ थाली में सफेद चंदन से चंद्रमा की आकृति बनाएं। इसके बाद आकृति के आसपास अक्षत यानी साबुत चावल रखें और सफेद पुष्प अर्पित करें। पूजा के दौरान श्रद्धापूर्वक ओम चंद्राय नमः’ और ओम सोमाय नमः’ मंत्र का जाप करें। इसके बाद चंद्रमा के प्रतीक के सामने जल से अर्घ्य देने की परंपरा निभाएं। पूजा करते समय मन में पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करें।

भगवान शिव का स्मरण कर करें पूजा
भगवान शिव के मस्तक पर चंद्रमा विराजमान हैं। इसलिए चंद्रमा के दर्शन नहीं होने पर महिलाएं भगवान शिव का स्मरण करते हुए उनकी पूजा भी कर सकती हैं। हाथ जोड़कर ओम सोमाय नमः’ और ओम चंद्राय नमः’ मंत्र का जाप करें। इसके बाद श्रद्धापूर्वक भगवान शिव को प्रणाम करें।
मंगलसूत्र और मांग में लगाएं पूजा का जल
पूजा पूरी होने के बाद कुछ पारंपरिक विधियों में अर्घ्य के जल को मंगलसूत्र और मांग पर लगाए। महिलाएं अपने पति के सिर पर भी जल के छींटे दे। इसके बाद करवा चौथ की कथा, पूजा और परिवार की परंपरा के अनुसार व्रत खोलने की प्रक्रिया पूरी करें। पूजा सामग्री का विसर्जन भी स्थानीय रीति के अनुसार करें।

