यमुनानगर। जिले के डारपुर बीट क्षेत्र में खैर के पेड़ों की कथित अवैध कटाई का मामला सामने आने के बाद वन विभाग की निगरानी व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। ग्रामीणों का दावा है कि जंगल से बड़ी संख्या में खैर के पेड़ काटे गए हैं और कटाई के बाद लकड़ी को अलग-अलग स्थानों पर छिपाकर रखा गया। इस मामले में ग्रामीणों ने विभाग से जुड़े कुछ कर्मचारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं।

ग्रामीणों के अनुसार डारपुर के जंगल में पिछले कुछ समय के दौरान करीब 200 से 300 खैर के पेड़ों को काटे जाने की आशंका है। उनका आरोप है कि जंगल से काटी गई खैर की लकड़ी को कथित तौर पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। इसी दौरान ग्रामीणों ने वन्यजीव विभाग के गार्ड प्रदीप और कर्मचारी आरिफ पर खैर की अवैध कटाई करने वालों के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया है।

कर्मचारियों के घर की छत पर लकड़ी मिलने का दावा

मामले को उस समय और गंभीर माना जाने लगा जब ग्रामीणों ने दावा किया कि विभाग के कर्मचारियों के घर की छत पर खैर की लकड़ी के कटे हुए टुकड़े रखे हुए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक वहां करीब 40 से 50 क्विंटल खैर की लकड़ी मौजूद होने की बात सामने आई है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है। ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद अब पूरे मामले की जांच और लकड़ी के स्रोत की पहचान महत्वपूर्ण हो गई है। सवाल यह भी है कि यदि लकड़ी वास्तव में जंगल से काटकर लाई गई है, तो उसे वहां तक कौन लेकर आया और इसकी अनुमति किस स्तर पर दी गई।

ग्रामीणों ने उठाई कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों का आरोप है कि वे कई बार जंगल में खैर के पेड़ों की कथित कटाई और लकड़ी की आवाजाही की जानकारी विभागीय अधिकारियों को देते रहे हैं। उनका दावा है कि शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से अवैध कटाई करने वालों के हौसले बढ़े हैं।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि अवैध कटाई की सूचना देने वालों पर ही कार्रवाई का दबाव बनाया जाता है और कुछ मामलों में झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी तक दी जाती है। इन आरोपों की भी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

विभाग ने कहा- दोषी मिला तो होगी कार्रवाई

मामले में डारपुर बीट के दरोगा नरेश कुमार ने कहा कि यदि किसी वन्यजीव विभाग के कर्मचारी के घर या उसकी छत पर अवैध रूप से काटी गई खैर की लकड़ी पाई जाती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि खैर की अवैध कटाई को लेकर विभाग की ओर से सख्ती बरती जा रही है।

अब पूरे मामले में जांच के बाद ही तस्वीर साफ होगी कि जंगल में खैर के पेड़ों की कटाई कितने बड़े स्तर पर हुई और बरामद या बताए जा रहे लकड़ी के जखीरे का वास्तविक स्रोत क्या है। साथ ही ग्रामीणों द्वारा लगाए गए वनकर्मियों की कथित मिलीभगत के आरोपों की सच्चाई भी जांच का अहम हिस्सा होगी।

फिलहाल डारपुर बीट में खैर के पेड़ों की कथित कटाई और वनकर्मियों पर लगे आरोपों ने वन संपदा की सुरक्षा और विभागीय निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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