Business Desk – Yes Bank AT-1 Bond Case : यस बैंक के 8,415 करोड़ रुपए के AT-1 बॉन्ड विवाद में अब सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की तैयारी है। शीर्ष अदालत से झटका मिलने के बाद बैंक अपने कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहा है।
वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी कानूनी राय ले रहा है कि उसे फैसले की समीक्षा की मांग करनी चाहिए या नहीं। इस मामले में अगला कदम यस बैंक की पूंजी और पूंजी पर्याप्तता अनुपात पर असर डाल सकता है।
क्या है 8,415 करोड़ रुपए के बॉन्ड का मामला?
यह विवाद मार्च 2020 में यस बैंक के 8,415 करोड़ रुपए के अतिरिक्त टियर-1 (AT-1) बॉन्ड को बट्टे खाते में डालने से जुड़ा है। उस समय बैंक वित्तीय संकट से गुजर रहा था और उसके पुनर्गठन की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान इन बॉन्ड को राइट-ऑफ कर दिया गया।
बॉन्डधारकों ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी। जनवरी 2023 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने बॉन्ड राइट-ऑफ करने के फैसले को रद्द कर दिया। इसके बाद यस बैंक, आरबीआई और अन्य पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।
15 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इससे बॉन्ड को राइट-ऑफ करने के फैसले पर कानूनी संकट गहरा गया।

RBI भी क्यों ले रहा है कानूनी राय?
यस बैंक अब सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहा है। दूसरी ओर, आरबीआई यह तय करने के लिए कानूनी राय ले रहा है कि उसे भी फैसले की समीक्षा की मांग करनी चाहिए या नहीं।
आरबीआई ने 2020 में बैंक के पुनर्गठन के दौरान बॉन्ड राइट-ऑफ का समर्थन किया था। इसलिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला केंद्रीय बैंक के लिए भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, आरबीआई की ओर से आगे की कार्रवाई पर अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।
बैंक की पूंजी पर क्या पड़ेगा असर?
8,415 करोड़ रुपए के बॉन्ड विवाद का संभावित असर यस बैंक की पूंजी पर पड़ सकता है। इससे बैंक के पूंजी पर्याप्तता अनुपात (Capital Adequacy Ratio) पर दबाव आने की आशंका है।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि इसका सीधा असर बैंक के शुद्ध मुनाफे पर भी पड़ेगा। अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि बैंक आगे क्या कानूनी और लेखांकन कदम उठाता है।
यस बैंक ने क्या कहा?
यस बैंक ने शेयर बाजार को दी जानकारी में कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश और उसके प्रभावों की समीक्षा कर रहा है। बैंक सभी उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहा है और आगे उचित कदम उठाएगा।
मामले से जुड़े लोगों के मुताबिक, बैंक कानूनी विकल्पों पर विचार करने के बाद ही बॉन्ड से संबंधित लेखांकन प्रक्रिया और पूंजी पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर अंतिम निर्णय ले सकता है।
अब आगे क्या होगा?
इस मामले में अब यस बैंक की पुनर्विचार याचिका और आरबीआई के अगले कदम पर नजर रहेगी। यदि सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल होती है, तो फैसले की समीक्षा की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
यस बैंक के लिए यह विवाद केवल कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि पूंजी से जुड़ा अहम मामला भी है। आगे होने वाले घटनाक्रम से यह स्पष्ट होगा कि 8,415 करोड़ रुपए के बॉन्ड को लेकर बैंक की देनदारी और पूंजी पर क्या प्रभाव पड़ता है। निवेशकों के लिए भी इस मामले में होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण रहेगी।

