Business Desk – Yes Bank Share : येस बैंक के शेयरों में लगातार दूसरे कारोबारी दिन दबाव बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के 8,415 करोड़ रुपए के AT-1 बॉन्ड मामले में फैसले के बाद शेयर एक दिन पहले इंट्रा-डे में 20% तक टूट गए थे। यह एक साल के निचले स्तर 16.98 रुपए पर पहुंच गया था।

आज भी शेयर बिकवाली के दबाव में है। फिलहाल BSE पर यह 1.98% गिरकर 17.79 रुपए पर कारोबार कर रहा है। कारोबार के दौरान शेयर 3.86% फिसलकर 17.45 रुपए तक आ गया था। इससे पहले 18 जून 2026 को शेयर ने 25.77 रुपए का एक साल का हाई बनाया था।

क्या है 8,415 करोड़ रुपए के AT-1 बॉन्ड का मामला?

सुप्रीम कोर्ट ने साल 2020 में येस बैंक के AT-1 बॉन्ड को राइट ऑफ यानी बट्टे खाते में डालने के फैसले को गलत ठहराया है। बैंक की रीस्ट्रक्चरिंग के दौरान करीब 8,400 करोड़ रुपए के इन बॉन्ड को राइट ऑफ किया गया था। इससे बॉन्डधारकों को अपना मूलधन गंवाना पड़ा था।

येस बैंक ने 2016 और 2017 में इन बॉन्ड के जरिए 8,415 करोड़ रुपए जुटाए थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, बैंक को इन बॉन्ड पर 9.5% और 9% की तय कूपन दर से भुगतान करना होगा। यह रकम बैंक के वित्त वर्ष 2026 के 3,476 करोड़ रुपए के शुद्ध मुनाफे से दोगुने से भी ज्यादा है।

बैंक ने क्या कहा?

येस बैंक ने एक्सचेंज फाइलिंग में कहा है कि वह फैसले के सभी कानूनी पहलुओं और उपलब्ध विकल्पों पर विचार कर रहा है। बैंक के मुताबिक, उसके पास पूंजी प्रबंधन के दूसरे विकल्प भी हैं, जिनसे ग्रोथ के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अतिरिक्त पूंजी से जुड़े फैसले लेने में लचीलापन बना रहेगा।

बैंक ने बताया कि 30 जून 2026 तक के CET-1 रेश्यो पर इस फैसले का असर करीब 250 बेसिस पॉइंट हो सकता है। हालांकि, प्रो-फॉर्मा आधार पर टियर-1 कैपिटल रेश्यो 14% पर बना रहेगा।

Citi ने घटाया टारगेट प्राइस

वैश्विक निवेश बैंकिंग फर्म Citi ने येस बैंक पर अपनी ‘सेल’ रेटिंग बरकरार रखी है। हालांकि, टारगेट प्राइस 22 रुपए से घटाकर 17.5 रुपए कर दिया है।

Citi के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट का फैसला बैंक के लिए झटका है। इससे CET-1 रेश्यो में करीब 250 बेसिस पॉइंट की कमी आ सकती है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि कूपन पेमेंट को स्वैच्छिक और नॉन-कम्युलेटिव मानने पर CET-1 रेश्यो केवल मूलधन के आधार पर घटकर 11.5% रह सकता है।

ब्रोकरेज के मुताबिक, इससे बैंक की बुक वैल्यू में 13% से 14% तक की गिरावट आ सकती है। पूंजी का बफर दोबारा मजबूत करने के लिए बैंक को अतिरिक्त पूंजी जुटाने की जरूरत पड़ सकती है।

निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?

AT-1 बॉन्ड मामले में भुगतान की देनदारी, पूंजी अनुपात पर संभावित असर और अतिरिक्त पूंजी जुटाने की जरूरत से येस बैंक के शेयर पर दबाव बना रह सकता है। हालांकि, आगे की स्थिति बैंक के कानूनी विकल्पों, फैसले के वित्तीय असर और पूंजी प्रबंधन पर निर्भर करेगी। Citi का टारगेट प्राइस ब्रोकरेज का अनुमान है, शेयर के भाव की गारंटी नहीं।