मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से चयनित 3567 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे. उन्होंने शिक्षकों की जिम्मेदारियों पर जोर देते हुए नियुक्ति के बाद लेन-देन की मांग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी.

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से चयनित 3567 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे. इस दौरान उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश को किसी भी कीमत पर सैफई सिंडिकेट नहीं बनने दिया जाएगा.

मुख्यमंत्री ने कहा कि 3567 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जा रहे हैं. पिछले एक सप्ताह में 5297 युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए जा चुके हैं, जबकि बीते नौ साल में साढ़े नौ लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं.

उन्होंने कहा कि सैफई सिंडिकेट से भी उन्होंने कहा है कि सरकार नियुक्ति पत्र देती जाएगी और विपक्ष गिनता जाए. उन्होंने यह भी कहा कि यदि गिनती नहीं आती तो शिवपाल यादव के साथ बैठकर गिनती सीखी जा सकती है.

शिक्षक की बड़ी जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नवनियुक्त शिक्षकों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराया. उन्होंने कहा कि शिक्षक को यह मानकर चलना चाहिए कि उसके ऊपर सबसे बड़ा उत्तरदायित्व है, इसलिए वह सम्मान का पात्र बनता है.

उन्होंने कहा कि शिक्षकों का दायित्व है कि वे खुद को लगातार तैयार रखें और विद्यार्थियों को हर तरह की नकारात्मकता से बचाएं. समाज को बांटने और देश व समाज को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों से छात्रों को सावधान करना भी शिक्षक की जिम्मेदारी है.

योगी ने कहा कि बच्चों को पाठ्यक्रम के अलावा महापुरुषों की जीवनी की जानकारी भी दी जानी चाहिए. देश और दुनिया में रोज होने वाली घटनाओं से विद्यार्थियों को अवगत कराना उनके सामान्य ज्ञान के लिए उपयोगी होगा.

नियुक्ति में लेन-देन पर चेतावनी

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी शिक्षक की जॉइनिंग में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए. यदि किसी प्रबंधक को कोई जिज्ञासा या समस्या है तो उसे शासन के सामने रखा जाना चाहिए.

उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि नियुक्ति पत्र मिलने के बाद यदि किसी प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता या शिक्षक से लेन-देन की मांग की गई तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी और उसे जेल जाना पड़ सकता है.

शिक्षक की भूमिका अलग

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत उस समय विश्वगुरु था, जब यहां दुनिया के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों का संचालन होता था. नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वप्रसिद्ध विश्वविद्यालय भारत की इसी विरासत का हिस्सा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि यह धरोहर आज भी मौजूद है और इसे जानने व पहचानने की जरूरत है. सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करा सकती है, लेकिन उस व्यवस्था में गति कैसी होगी, यह प्रशिक्षित विद्यार्थी तय करेगा.

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उद्योग लगाने के लिए माहौल और सहायता उपलब्ध करा सकती है, लेकिन वही उद्योग नवाचार और रोजगार का आधार बनेगा या नहीं, यह विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करने वाले शिक्षकों पर भी निर्भर करता है.

उन्होंने महामना मदन मोहन मालवीय का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने 1916 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की थी. पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भी स्वयं को शिक्षक के रूप में प्रस्तुत करते थे.

मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन देश के दूसरे राष्ट्रपति थे और उनके जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है. वहीं कृष्णद्वैपायन व्यास के जन्मदिन को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है.

उन्होंने कहा कि दोनों अवसर गुरु के महत्व और योगदान को याद करते हुए वर्तमान पीढ़ी को प्रेरित करते हैं. इसी कारण शिक्षक की भूमिका अन्य जिम्मेदारियों से अलग है. एक प्रशासनिक अधिकारी अपना उत्तरदायित्व निभा सकता है, लेकिन वह जरूरी नहीं कि एक अच्छा शिक्षक भी हो.

आयोग की जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रशांत कुमार को शिक्षक आयोग का अध्यक्ष इसलिए बनाया गया है ताकि नकल माफिया की कमर तोड़ी जा सके. उन्होंने कहा कि प्रतिभावान छात्रों के साथ दोबारा किसी सैफई सिंडिकेट को अन्याय करने का दुस्साहस न हो, इसी उद्देश्य से उन्हें जिम्मेदारी दी गई है.

योगी ने कहा कि प्रशांत कुमार ने उत्तर प्रदेश पुलिस में अच्छा काम किया है और अब आयोग व बोर्डों की दिशा को भी सुधारना है.