सुप्रीम कोर्ट में SC-ST आरक्षित सीटों के रोटेशन की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने दखल देने से इनकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को याचिकाकर्ता से कहा कि संसद और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों (SC) और अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए आरक्षित सीटों के mandatory rotation की मांग न्यायपालिका का नहीं, बल्कि विधायिका का मामला है.

याचिका उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की 191-कादीपुर विधानसभा सीट से जुड़े मतदाता जगदीश सिंह ने लगाई थी. यह सीट 1952 में पहले चुनाव के बाद से सात दशक से ज्यादा समय से SC के लिए आरक्षित है.

सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को देश में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों का जिक्र आया, जब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं से पूछा कि उन्होंने अदालत का दरवाजा क्यों खटखटाया, “आप गलत नंबर डायल कर रहे हैं. यह विरोध-प्रदर्शन और नारेबाजी करने का अच्छा मौसम है। आप भी ऐसा कर सकते हैं.”

अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों को रोटेट करने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान CJI कांत ने कहा कि अपनी आवाज़ उठाएं और कहें कि अब समय आ गया है कि विधायिका इस दिशा में कुछ कदम उठाए.

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि कई निर्वाचन क्षेत्र 1972 से ही आरक्षित चले आ रहे हैं, और रोटेशन न होने की वजह से एक ही परिवार के तीन-चार लोग बार-बार चुनाव लड़ते आ रहे हैं.

सुनवाई के दौरान, जस्टिस बागची ने कहा कि अदालत अनुसूची पर संविधान को दोबारा नहीं लिख सकती है और हम किसी प्रावधान को रद्द कर सकते हैं, हम किसी प्रावधान के अर्थ को सीमित कर सकते हैं लेकिन आरक्षण के संबंध में रोटेशन शुरू करने की बात कहकर इसे दोबारा नहीं लिख सकते. 

सुनवाई के दौरान, चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि यह मान लेना सही नहीं है कि मतदान जाति के आधार पर होता है.

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m