रायपुर। भारत की संस्कृति और सभ्यता में नारी हमेशा से ही सृजन, शक्ति और संवेदना की प्रतीक रहीं हैं। एक प्राचीन प्राचीन उक्ति “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता” आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी हजारों साल पहले थी। मगर एक समय इसी देश के लिए यह भी सत्य रहा कि समाज में महिलाओं को उनके अधिकारों और अवसरों से वंचित रखा गया था। मगर आधुनिक भारत में स्थिति बहुत तेज़ी से बदल रही है और बदलाव के इस दौर में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के रूप में एक बड़ा कदम उठाया गया है।

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने वाला यह ऐतिहासिक अधिनियम महज़ एक संवैधानिक संशोधन नहीं बल्कि भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को सशक्त बनाने की दिशा में एक मज़बूत क्रांतिकारी कदम है।
सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय समृद्धि के लिए पहचाना जाने वाला छत्तीसगढ़ इस अधिनियम लिए भी अग्रदूत बनकर उभरने वाला है। केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों ने राज्य में महिला सशक्तिकरण को एक नई सामाजिक चेतना देने का काम किया है। राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं के उत्थान के लिए जो कदम उठाए गए हैं वे न सराहनीय भी हैं और पूरे देश के लिए प्रेरणास्रोत भी।

लोकतंत्र में समान भागीदारी की दिशा तय करेगी, नारी शक्ति वंदन अधिनियम
भारतीय लोकतंत्र में एक मील का पत्थर बनने जा रहा है नारी शक्ति वंदन अधिनियम । महिला आरक्षण की मांग को एक लम्बे समय के बाद इस अधिनियम के माध्यम से मूर्त रूप दिया जा रहा है। इस अधिनियम में संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं का 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पीछे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और दृढ़ इच्छाशक्ति स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उनका मानना है कि जब देश की आधी आबादी को निर्णय लेने की प्रक्रिया में समान अवसर मिलेगा तब ही राष्ट्र का वास्तविक विकास संभव हो सकेगा। छत्तीसगढ़ की साय सरकार में इस अधिनियम का व्यापक स्वागत हुआ है। राज्य की महिलाओं में आत्मविश्वास और उत्साह की नई लहर देखी जा रही है, क्योंकि नारी शक्ति वंदन अधिनियम उन्हें प्रतिनिधित्व के साथ आत्मसम्मान और अधिकार की एक नई पहचान भी देगा।

मातृशक्ति के प्रति सम्मान से भरा है मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का दृष्टिकोण
इस अधिनियम को महिलाओं के अधिकारों की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मातृशक्ति को संबोधित करते हुए कहा कि “यह समय केवल दर्शक बनने का नहीं, बल्कि इतिहास रचने का है।आप केवल इतिहास की साक्षी ही नहीं बनेंगी, बल्कि उसके निर्माण में आपकी सक्रिय भूमिका भी सुनिश्चित होगी।”
छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने इस वर्ष को “महतारी गौरव वर्ष” के रूप में मनाने का भी निर्णय लिया है जो इस बात का प्रमाण स्वयं है कि राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण को कितनी प्राथमिकता देती है।महतारी वंदन योजना के रूप में छत्तीसगढ़ में महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता की नींव पहले ही रखी जा चुकी है।

राजनीतिक सशक्तिकरण बढ़ाएगी निर्णय लेने की क्षमता
छत्तीसगढ़ की साय सरकार में पहले ही स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप पंचायत से लेकर नगर निगम तक महिलाओं का वर्चस्व बढ़ा है। शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्यमिता को विशेष प्राथमिकता देते हुए छत्तीसगढ़ की साय सरकार पहले ही महिलाओं के सामाजिक उत्थान के लिए कई योजनाओं का संचालन कर रही है और अब नारी शक्ति वंदन अधिनियम से अब यह भागीदारी राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक विस्तारित होगा और महिलाओं को नीति निर्माण में अपनी आवाज रखने का अवसर मिलेगा।
इस परिवर्तन से महिलाओं की शक्ति, संख्या के साथ कार्य की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। महिलाएं अपने अनुभव और संवेदनशील दृष्टिकोण के माध्यम से समाज के विभिन्न मुद्दों को बेहतर ढंग से समझती हैं जिससे नीतियां अधिक प्रभावी बनेंगी यही तथ्य इस अधिनियम का आधार है।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम से हो रहा लोकतंत्र में समावेशिता का प्रवेश
नारी शक्ति वंदन अधिनियम से लोकतंत्र अधिक समावेशी और प्रतिनिधिक बनेगा लोकतंत्र में एक सकारात्मक बदलाव आएगा है जो समाज के सभी वर्गों को समान अवसर देकर वास्तविक लोकतंत्र स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सामाजिक संगठनों और महिलाओं से इस पहल को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया है। उनका मानना है कि जितनी समाज की भागीदारी बढ़ेगी उतना ही इस अधिनियम का वास्तविक लाभ मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सशक्त आवाज ही बना सकती है इस परिवर्तन को स्थायी।
छत्तीसगढ़ बना हुआ है महिला सशक्तिकरण का मॉडल राज्य
वर्तमान में छत्तीसगढ़ देश के उन राज्यों में शामिल हो चुका है जहां महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हो रहे हैं। राज्य के साय सरकार की मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति छत्तीसगढ़ को एक मॉडल राज्य के रूप में स्थापित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ ने महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में जो कदम उठाए हैं, उससे न केवल वर्तमान बेहतर हो रहा है बल्कि भविष्य के लिए भी नींव मजबूत तैयार हो रही है। अब वह समय है जब समाज को भी यह समझना होगा कि नारी केवल परिवार की धुरी ही नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण की आधारशिला भी है। क्योंकि सशक्त महिला से सशक्त समाज और सशक्त समाज से प्रगति के शिखर पर फंचता है राष्ट्र।

