वीरेंद्र गहवई, बिलासपुर। मस्तूरी गोलीकांड के एक सह आरोपी की याचिका और उसके कृत्य को लेकर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने कड़ी और तल्ख टिप्पणी की है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के साथ ही महाधिवक्ता कार्यालय के एक पूर्व विधि अधिकारी के कृत्य को लेकर भी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा, इन सब तथ्यों को देखते हुए कहा जा सकता है कि यह बेंच हंटिंग का मामला है। इस तरह के कृत्य की कतई सराहना नहीं की जा सकती।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है, तथ्यों से स्पष्ट है, यह बेंच हंटिंग का स्पष्ट मामला है, जिसे इस न्यायालय द्वारा प्रोत्साहित या सराहा नहीं जा सकता है। इस संबंध में वकील रणबीर सिंह मरहास द्वारा पूछे गए स्पष्ट प्रश्न का वे उचित उत्तर नहीं दे सके, इसलिए सह-आरोपी देवेश सुमन उर्फ निक्कू का आचरण, जिसने उक्त मामले को उस बेंच से अपवाद बनाने के लिए दायर की है, जिसने किशोर द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया था, अत्यंत निंदनीय है। उसे कड़ी निंदा का पात्र माना जाना चाहिए और उसे किसी भी हालत में क्षमा नहीं किया जा सकता है।

रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होता है कि सह-आरोपियों में से एक जो नाबालिग है, ने किशोर न्याय (देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 102 के तहत अपनी रिहाई के लिए छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की है। उसे 29 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था और बिलासपुर के अवलोकन गृह में हिरासत में रखा गया था, जो पुलिस थाना मस्तूरी, जिला बिलासपुर में बीएनएस की धारा 109, 61(2), 3(5) और शस्त्र अधिनियम की धारा 25 और 27 के तहत दंडनीय है। उसने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश FTC, बाल न्यायालय, बिलासपुर द्वारा आपराधिक अपील में 31 दिसंबर 2025 को पारित आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की है, जिसमें प्रधान न्यायाधीश, किशोर न्याय बोर्ड बिलासपुर द्वारा 09 दिसंबर 2025 को पारित आदेश को बरकरार रखा गया था। इसके तहत किशोर न्याय अधिनियम की धारा 12 के तहत दायर आवेदन खारिज कर दिया गया और उक्त आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को पंजीकृत किया गया।
समन्वय पीठ के समक्ष सुनवाई हुई और उक्त पुनरीक्षण याचिका को पीठ ने 03 फरवरी 2026 के आदेश द्वारा खारिज कर दिया। इसके बाद सह-आरोपी अकबर खान द्वारा, जिसे उसी अपराध के तहत गिरफ्तार किया गया था, बीएनएसएस, 2023 की धारा 483 के तहत एक अन्य जमानत याचिका दायर की गई, जो उसी पीठ के समक्ष आई, जिसने 13 फरवरी 2026 को खारिज कर दिया। उसी दिन उक्त जमानत याचिका स्वीकार कर ली गई और मामले की डायरी मंगवाई गई। मामले को 23 फरवरी 2026 को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया।
23 फरवरी 2026 को एक अन्य सह-आरोपी मोहम्मद मतीन द्वारा दायर एक अन्य जमानत याचिका, जिसे उसी अपराध के संबंध में गिरफ्तार किया गया था, उसी बेंच के समक्ष सूचीबद्ध होने के कारण, उक्त बेंच ने दोनों मामलों को 03 मार्च .2026 को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। 03 मार्च 2026 को दोनों मामले को फिर से सूचीबद्ध किया गया। पीठ ने मामले को 17 मार्च 2026 को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था। इसी बीच, जब एक अन्य सह-आरोपी मोहम्मद मुस्तकिन उर्फ नफीस द्वारा दायर एक अन्य जमानत याचिका, जिसे इसी अपराध के संबंध में गिरफ्तार किया गया था, 12 मार्च 2026 को इस पीठ के समक्ष सूचीबद्ध की गई तो इस पीठ ने ये आदेश पारित किए।
जानिए क्या है बेंच हंटिंग
बेंच हंटिंग (Bench Hunting) का अर्थ है मुकदमों में अपने पक्ष में फैसला पाने के लिए वकीलों या याचिकाकर्ताओं द्वारा किसी विशेष जज या बेंच के सामने अपना मामला सूचीबद्ध (List) कराने की कोशिश करना। यह न्याय प्रणाली की निष्पक्षता को कमजोर करता है और इसे सुप्रीम कोर्ट ने “दर्दनाक” और न्यायिक अखंडता के लिए खतरा बताया है।
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