अजय सैनी, भिवानी। हरियाणा के भिवानी में स्थानीय लघु सचिवालय स्थित डीआरडीए सभागार में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र के सांसद चौधरी धर्मबीर सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सिवानी से सोनीपत और सिवानी से जींद जाने वाली बिजली की हाईटेंशन टावर लाइन से प्रभावित किसानों की समस्याओं पर गहन चर्चा हुई। बैठक में बवानीखेड़ा के विधायक कपूर सिंह वाल्मीकि, डीसी साहिल गुप्ता और भाजपा जिलाध्यक्ष विरेंद्र कौशिक भी विशेष रूप से मौजूद रहे।
केंद्रीय मंत्री के सामने रखेंगे बात, किसानों को ज्यादा मुआवजे का भरोसा
सांसद चौधरी धर्मबीर सिंह ने बैठक में आए तमाम किसानों को पूरी तरह आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि टावर लाइन से संबंधित जमीन के रेट को लेकर बनाई गई मौजूदा पॉलिसी और बंद हो चुके मुआवजे के पोर्टल को फिर से खुलवाने के लिए वे जल्द ही केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल से मुलाकात करेंगे। सांसद ने साफ शब्दों में कहा कि वे हर कदम पर किसानों के साथ खड़े हैं और उनकी पूरी कोशिश रहेगी कि किसानों को उनकी जमीन का अधिक से अधिक मुआवजा राशि दिलवाई जा सके। इस दौरान बवानीखेड़ा के विधायक कपूर सिंह वाल्मीकि ने किसानों से अपील की कि वे आपस में एक राय बनाकर अपना लिखित प्रस्ताव प्रशासन को सौंपें।
दो अलग-अलग लाइनों के लिए कुल 245 टावरों का निर्माण होना है
आपको बता दें कि सिवानी से सोनीपत को जाने वाली टावर लाइन के रास्ते में जिला भिवानी के झुप्पा, बुद्ध शैली, घंघाला, मोहिला, खरकड़ी, गढवा, भेरा, मिरान, दरियापुर, छपार जोगियान, छपार रांगड़ान, गारनपुरा, पिंजोखरा, डाडम, बागनवाला, तोशाम, अलखपुरा, सागवन, भुरटाना, बलियाली, बवानीखेड़ा, सुमड़ा खेड़ा, लोहारी जाटू, मंढाणा, धनाना और बडेसरा गांवों की जमीन आ रही है। इन गांवों में कुल 195 बिजली के टावर लगने हैं। इसी तरह सिवानी से जींद जाने वाली दूसरी लाइन के तहत भिवानी जिले के झुप्पा कलां, बुद्ध शैली, मोहिला, बख्तावरपुरा, भेरा और धूलकोट गांवों में 50 टावर खड़े किए जाने हैं।
मार्केट वैल्यू के हिसाब से मिले एकमुश्त पैसा: किसान
बैठक के दौरान प्रभावित किसानों ने अपनी मांगें पुरजोर तरीके से प्रशासन के सामने रखीं। किसानों का कहना है कि जब तक उन्हें जमीन का वाजिब और सही मुआवजा नहीं मिल जाता, तब तक उनके खेतों में टावर लगाने का काम बिल्कुल शुरू न किया जाए। किसानों ने मांग उठाई कि उन्हें टुकड़ों में नहीं बल्कि एकमुश्त मुआवजा दिया जाए और जमीन का रेट मौजूदा मार्केट वैल्यू के हिसाब से तय हो ताकि किसी भी किसान को नुकसान न उठाना पड़े। इस पर सांसद ने कहा कि अलग-अलग क्षेत्र के हिसाब से जमीन के कलेक्टर रेट बदल जाते हैं, चूंकि यह पूरा मामला सीधे केंद्र सरकार के अधीन आता है, इसलिए केंद्रीय मंत्री से मिलकर ही इसका ठोस हल निकाला जाएगा।
पुराने प्रोजेक्ट का बकाया मुआवजा देने की भी उठी मांग
इस अहम बैठक में किसान सभा की तरफ से मास्टर जग रोशन, कामरेड ओमप्रकाश, दयानंद पूनिया और कमल प्रधान ने भी हिस्सा लिया। किसान नेताओं ने अधिकारियों के सामने एक और गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा कि ढाणा नरसान से ईशरवाल तक पहले जो बिजली लाइन डाली गई थी, उसमें कुसुंभी से ईशरवाल तक के शेष किसानों को अभी तक उनका मुआवजा नहीं मिला है। उन्होंने मांग की कि इन बचे हुए किसानों को भी पहले वाले गांवों के समान ही तुरंत मुआवजा दिया जाए। इस उच्च स्तरीय बैठक में भिवानी के एसडीएम महेश कुमार, सीटीएम अनिल कुमार, तोशाम के एसडीएम संदीप कुमार, सिवानी की एसडीएम विजया मलिक सहित राजस्व विभाग के अधिकारी, पावर ग्रिड के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण किसान मौजूद रहे।

