बहादुरगढ़ में बढ़ रहे फैक्ट्री हादसों को देखते हुए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। नियमों का पालन न करने वाली फैक्ट्रियों को सील करने और आपराधिक मुकदमे दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।

संजीत कबलाना, झज्जर। औद्योगिक नगरी बहादुरगढ़ में लगातार हो रहे फैक्ट्री हादसों और मजदूरों की असमय मौतों के बाद जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। उपायुक्त एवं जिला मजिस्ट्रेट वर्षा खांगवाल ने जिले की सभी औद्योगिक इकाइयों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराने और विशेष निरीक्षण अभियान चलाने के कड़े आदेश जारी किए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा नियमों के प्रति किसी भी स्तर पर लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हाल के वर्षों में हुए कई बॉयलर ब्लास्ट और अन्य हादसों ने प्रशासन को झकझोर दिया है, जिसके चलते सुरक्षा मानकों की मजबूती अब सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है। यह कदम क्षेत्र में कार्यरत हजारों मजदूरों की जान बचाने के लिए अनिवार्य माना जा रहा है।

सुरक्षा मानकों की होगी जांच

जिला प्रशासन ने निरीक्षण हेतु एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है, जिसमें अग्निशमन विभाग, औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय नगर निकाय और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। यह टीम प्रत्येक फैक्ट्री का दौरा कर बिल्डिंग प्लान, फायर एनओसी, स्प्रिंकलर सिस्टम, आपातकालीन निकास मार्गों और श्रमिकों के सुरक्षा उपकरणों की गहन जांच करेगी। उपायुक्त वर्षा खांगवाल ने चेतावनी दी है कि यदि निरीक्षण के दौरान सुरक्षा मानकों या भवन निर्माण नियमों में कोई भी कमी पाई जाती है, तो संबंधित फैक्ट्री को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया जाएगा। फैक्ट्री का संचालन तब तक बंद रहेगा जब तक सुरक्षा संबंधी सभी कमियां पूरी नहीं कर ली जातीं।

सख्त कार्रवाई और कानूनी शिकंजा

प्रशासन की ओर से स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सुरक्षा में चूक मिलने पर फैक्ट्री मालिकों के खिलाफ न केवल सीलिंग की कार्रवाई होगी, बल्कि उन पर आपराधिक मुकदमे भी दर्ज किए जाएंगे। डीसी वर्षा खांगवाल ने कहा कि कामगारों की जान-माल की रक्षा करना जिला प्रशासन का मुख्य कर्तव्य है। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि क्या कर्मचारियों को नियमित मॉक ड्रिल और सुरक्षा प्रशिक्षण दिया जा रहा है या नहीं। बहादुरगढ़ में पहली बार इतने बड़े स्तर पर सुरक्षा ऑडिट अभियान चलाया जा रहा है, जिससे औद्योगिक इकाइयों में आपदा प्रबंधन को मजबूत किया जा सके और भविष्य में किसी भी दर्दनाक दुर्घटना को होने से रोका जा सके।