पंचकूला । 661 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई के बाद वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आर.के. सिंह और सुपरिटेंडेंट प्रिंस को अदालत में पेश किया गया, जहां से दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।

सीबीआई की जांच में खुलासा हुआ है कि मामले के कथित मास्टरमाइंड और आरोपियों के बीच हुई कई महत्वपूर्ण चैट को डिलीट किया गया था। जांच एजेंसी को संदेह है कि साक्ष्य मिटाने और जांच को प्रभावित करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया।

डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी

जांच के दौरान जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच की जा रही है। सीबीआई यह पता लगाने में जुटी है कि कथित बैंक घोटाले की योजना कैसे बनाई गई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

करोड़ों के लेन-देन की पड़ताल

एजेंसी बैंक खातों, वित्तीय दस्तावेजों और संदिग्ध लेन-देन की भी गहन जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।

साक्ष्य मिटाने के आरोपों पर फोकस

सीबीआई का विशेष ध्यान डिलीट की गई चैट और डिजिटल रिकॉर्ड की रिकवरी पर है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या किसी अन्य व्यक्ति ने भी साक्ष्य मिटाने या मामले को छिपाने में भूमिका निभाई थी।फिलहाल दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और सीबीआई मामले की विस्तृत जांच में जुटी हुई है। आने वाले दिनों में इस बहुचर्चित बैंक फ्रॉड मामले में और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है।