पिछले दिनों FSSAI ने डाबर इंडिया को “100% प्योर”, “100% नेचुरल” और “100% ऑर्गेनिक” जैसे क्लेम करने वाले कई फूड प्रोडक्ट्स की सेल रोकने का निर्देश दिया था. इस फैसले के खिलाफ डाबर ने हाई कोर्ट में अपील की. जिसपर सुनवाई करते हुए जस्टिस अमित महाजन ने FSSAI के 3 अगस्त के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है और सभी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. बता दें कि, FSSAI ने डाबर को “100%” क्लेम वाले कई प्रोडक्ट्स की सेल्स तुरंत बंद करने का निर्देश दिया था. प्राधिकरण का कहना था कि ऐसे क्लेम अस्पष्ट हैं और इनसे कंज्यूमर्स के गुमराह होने की संभावना है.
कंपनी का तर्क- जवाब देने का मौका नहीं दिया गया
इस आदेश के दायरे में आने वाले प्रोडक्ट्स में डाबर हनी, डाबर हनी स्क्वीजी, डाबर सुंदरबन हनी, डाबर हिमालयन एपल साइडर विनेगर, डाबर वर्जिन कोकोनट ऑयल, डाबर काऊ घी, रियल एक्टिव 100% टेंडर कोकोनट वॉटर, डाबर होममेड कोकोनट मिल्क और डाबर ऑर्गेनिक हनी शामिल हैं. डाबर ने इस आदेश को इस आधार पर चुनौती दी कि रेगुलेटर ने बिना कोई कारण बताओ नोटिस या सुधार का नोटिस जारी किए और कंपनी को अपनी बात रखने का मौका दिए बिना ही यह कदम उठाया.
फैसले से व्यावसायिक नुकसान हुआ
कंपनी का तर्क है कि ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (एडवरटाइजिंग एंड क्लेम्स) रेगुलेशंस, 2018’ के तहत रेगुलेटर के लिए जरूरी है कि वह ऐसी कोई भी कार्रवाई करने से पहले फूड बिजनेस ऑपरेटर से स्पष्टीकरण मांगे और उनके जवाब पर विचार करे. डाबर का यह भी कहना है कि इस आदेश का मतलब है कि उन्हें बाज़ार में पहले से मौजूद प्रोडक्ट्स को वापस मंगाना होगा या उनकी रीपैकेजिंग करनी होगी. कंपनी ने कहा कि FSSAI ने सोशल मीडिया पर इस आदेश का प्रचार किया और कुछ चैनल पार्टनर्स व ऑनलाइन रिटेलर्स को प्रभावित प्रोडक्ट्स न बेचने की सलाह दी, जिससे तुरंत व्यावसायिक नुकसान हुआ.
कानूनी आधार को भी चुनौती
कंपनी ने रोक लगाने वाले इस आदेश के कानूनी आधार को भी चुनौती दी है. उनका तर्क है कि ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006’ की धारा 18 केवल मार्गदर्शक सिद्धांत तय करती है और किसी ‘डेजिग्नेटेड ऑफिसर’ को प्रोडक्ट्स की बिक्री पर रोक लगाने का स्वतंत्र अधिकार नहीं देती है. डाबर ने यह भी कहा है कि FSSAI का आदेश बिना किसी ठोस कारण के दिया गया है और इसमें यह नहीं बताया गया है कि “100% प्योर” या “100% नेचुरल” जैसे दावे लागू नियमों का उल्लंघन कैसे करते हैं. कंपनी के अनुसार, आदेश में बिना किसी ठोस निष्कर्ष के बस यह कहा गया है कि ये दावे “भ्रामक लग सकते हैं”.
घटिया क्वालिटी का कोई आरोप नहीं
FMCG सेक्टर की इस बड़ी कंपनी का तर्क है कि अकेले ऐसे शब्दों के इस्तेमाल को भ्रामक नहीं माना जा सकता, खासकर उन प्रोडक्ट्स के मामले में जो किसी एक सामग्री से बने हों या पूरी तरह से नेचुरल सामग्री से तैयार किए गए हों. डाबर ने यह भी कहा है कि FSSAI ने प्रोडक्ट्स में मिलावट, असुरक्षित होने, नकली या घटिया क्वालिटी का कोई आरोप नहीं लगाया है. विवाद केवल उनकी लेबलिंग और विज्ञापन तक ही सीमित है. कंपनी ने 3 अगस्त के रोक वाले आदेश को रद्द करने और अपनी याचिका पर फैसला होने तक इसके अमल पर अंतरिम राहत की मांग की है. शुक्रवार को दोपहर 2 बजकर 10 मिनट पर डाबर इंडिया के शेयर 1.25 फीसदी की गिरावट के साथ 408.80 रुपए पर कारोबार कर रहा था.
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