हेमंत शर्मा, इंदौर। नेमावर रोड स्थित ग्राम असरावद बुजुर्ग के किसान विजय सिंह की आत्महत्या का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। करीब 15 महीने पहले हुई इस घटना को लेकर अब मृतक किसान का परिवार खुलकर सामने आया है और कांग्रेस के पूर्व जनपद अध्यक्ष राम सिंहपारिया, गोवा के मुख्यमंत्री के करीबी बताए जा रहे निलेश गुर्जर समेत कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। परिवार का दावा है कि जमीन विवाद, करोड़ों रुपए की मांग और लगातार बनाए गए दबाव ने विजय सिंह को इस कदर तोड़ दिया कि आखिरकार उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया। 

परिजनों के अनुसार 1 मार्च 2025 को विजय सिंह ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उस समय मामला आत्महत्या के रूप में दर्ज हुआ, लेकिन अब परिवार का आरोप है कि इसके पीछे जमीन विवाद और कथित मानसिक प्रताड़ना की लंबी कहानी छिपी हुई है। उनका कहना है कि प्रभावशाली लोगों के कारण आज तक उन्हें न्याय नहीं मिल सका। मृतक किसान की मां माया बाई ने 11 अप्रैल 2025 को थाना खुड़ेल में लिखित शिकायत देकर कई गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत के अनुसार 8 बीघा जमीन को लेकर विवाद चल रहा था और कुछ लोग जमीन को कम कीमत पर अपने कब्जे में लेना चाहते थे। 

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परिवार का आरोप है कि जमीन विवाद को खत्म करने के नाम पर करोड़ों रुपए की मांग की जा रही थी, जिससे विजय सिंह लगातार तनाव में रहने लगे थे। माया बाई का दावा है कि बाबूलाल और फूल सिंह के साथ विजय का जिला न्यायालय में राजीनामा हो चुका था। परिवार के अनुसार इस समझौते के तहत करीब डेढ़ करोड़ रुपए लेकर बाबूलाल और फूल सिंह ने विवाद समाप्त करने पर सहमति जताई थी। लेकिन बाद में दोनों ने संभागीय कार्यालय में फिर से आपत्ति लगा दी, जिससे विवाद दोबारा शुरू हो गया। परिवार का आरोप है कि फरवरी 2025 में निलेश गुर्जर विजय सिंह को राम सिंह पारिया के होटल वृंदावन लेकर गया था। वहां कथित तौर पर विजय सिंह पर 2 करोड़ रुपए देने का दबाव बनाया गया। माया बाई का कहना है कि निलेश गुर्जर, राम सिंह पारिया, बाबूलाल और अन्य लोगों द्वारा लगातार बनाए गए दबाव ने उनके बेटे को मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ दिया था। उनका दावा है कि इसी घटनाक्रम के बाद विजय सिंह घर लौटे और बाद में उन्होंने आत्महत्या कर ली। 

विजय सिंह के भाई और परिवार का आरोप है कि उन्होंने पुलिस को दस्तावेज, गवाह और कई महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध कराई हैं। इसके बावजूद अब तक कोई ऐसी कार्रवाई नहीं हुई जिससे उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद दिखाई दे। परिवार का कहना है कि जिन लोगों के नाम शिकायत में दिए गए हैं, वे आज भी खुलेआम घूम रहे हैं और शिकायत के बाद भी परिवार पर दबाव बनाने की कोशिशें जारी हैं। मृतक किसान के परिजनों का आरोप है कि मामले का एक आरोपी निलेश गुर्जर लंबे समय से फरार है। उनका कहना है कि अदालत से जमानत निरस्त होने के बावजूद वह पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। परिवार का दावा है कि आरोपी की संभावित लोकेशन की जानकारी होने के बावजूद गिरफ्तारी नहीं की जा रही।माया बाई ने पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि मामले में बड़े पैमाने पर पैसों का लेनदेन हुआ है, जिसके कारण उनकी सुनवाई नहीं हो रही। परिवार का कहना है कि यदि पुलिस के पास शिकायत, दस्तावेज और गवाह मौजूद हैं तो फिर कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हो रही है। ग्राम असरावद बुजुर्ग और आसपास के इलाकों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

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ग्रामीणों का कहना है कि जमीन की बढ़ती कीमतों के साथ विवाद भी बढ़ते जा रहे हैं और कई किसान ऐसे मामलों में कानूनी लड़ाई और दबाव के बीच पिस रहे हैं। वहीं इस पूरे मामले में जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उनकी ओर से सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या किसान विजय सिंह की मौत सिर्फ आत्महत्या थी या फिर जमीन विवाद, करोड़ों रुपए की कथित मांग और प्रभावशाली लोगों के दबाव की कहानी अभी पूरी तरह सामने आना बाकी है? और अगर परिवार के आरोपों में सच्चाई है तो आखिर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई कब होगी?

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