सतीश सिंह, लखनऊ. राज्यसभा सांसद एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी बृजलाल ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव के कथित बयान पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में आने पर मुकदमे वापस लेने और सजायाफ्ता आजम खां को उत्तर प्रदेश का गृह मंत्री बनाने की बात करने का मतलब इन्हें अपने हित में कानून का गला घोंटने में कोई संकोच नही है. बृजलाल ने कहा कि शिवपाल सिंह यादव का संदेश साफ है कि उनके लिए कानून से पहले व्यक्तिगत और पार्टी हित हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी तुष्टिकरण की राजनीति के लिए कानून की मर्यादा से समझौता करने में भी संकोच नहीं करती.
1978 के संभल दंगे का उठाया मुद्दा
बृजलाल ने 1978 के संभल दंगे का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि 29 मार्च 1978 को हुए दंगे में बड़ी संख्या में हिंदुओं की हत्या हुई थी. उनके मुताबिक, मामले की विवेचना के बाद आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की गई थी और मुकदमे अंतिम चरण में थे. उन्होंने दावा किया कि दिसंबर 1993 में मुलायम सिंह यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद दंगाइयों के मुकदमे वापस ले लिए गए. बृजलाल ने कहा कि इसका असर संभल के सामाजिक माहौल पर पड़ा और हिंदू समुदाय में भय एवं निराशा का वातावरण बना.
इसे भी पढ़ें : सिर्फ राम के नाम पर वोट चाहिए! अखिलेश यादव ने चढ़ावा चोरी और शिक्षा-परीक्षा के मुद्दे पर BJP को घेरा, जानिए ऐसा क्या कहा?
बृजलाल ने कहा कि शिवपाल सिंह यादव अब 2024 में संभल की जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मुकदमों को वापस लेने की बात कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इन मामलों में समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क भी आरोपी हैं.उन्होंने कहा कि यदि सत्ता में आने पर मुकदमे वापस लेने की घोषणा की जाती है तो यह कानून और न्यायपालिका की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है. बृजलाल ने आजम खां का जिक्र करते हुए कहा कि वह कई मामलों में दोषसिद्ध हो चुके हैं और उनके खिलाफ बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद उन्हें उत्तर प्रदेश का गृह मंत्री बनाने की बात करना कानून के शासन की भावना के विपरीत है.
अखिलेश सरकार पर भी लगाए आरोप
पूर्व आईपीएस अधिकारी ने अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती सपा सरकार पर भी मुकदमे वापस लेने के आरोप लगाए. उन्होंने मैनाठेर, मुरादाबाद में 6 जुलाई 2011 को तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह पर हुए हमले से जुड़े मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि सत्ता में आने के बाद इस मामले को वापस लेने का प्रयास किया गया था. बृजलाल ने दावा किया कि बाद में अदालत ने इस मामले में आरोपियों को सजा सुनाई. उन्होंने अखिलेश यादव सरकार पर आतंकवाद से जुड़े मामलों में भी चार्जशीट वापस लेने की कोशिश का आरोप लगाया और कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुकदमे वापस लेने की अनुमति नहीं दी.


